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अचला सप्तमी 2025: श्रीकृष्ण पुत्र के कुष्ठ रोग से मुक्ति का पावन व्रत
हिंदू धर्म में अचला सप्तमी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान सूर्यनारायण को समर्पित है जिसे माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 5 फरवरी को पड़ रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी। आइए जानें इस व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि और महत्व।
अचला सप्तमी की पौराणिक कथा
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब ने एक बार ऋषियों का अपमान कर दिया। इससे क्रोधित होकर ऋषियों ने उन्हें कुष्ठ रोग का शाप दे दिया। रोग से पीड़ित साम्ब ने भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछा तो उन्होंने सूर्य देव की आराधना करने को कहा।
- साम्ब ने माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी व्रत का पालन किया
- 12 वर्षों तक नियमित रूप से सूर्यनारायण की पूजा की
- अंत में सूर्य देव प्रसन्न हुए और उन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली
अचला सप्तमी 2025 की तिथि एवं मुहूर्त
5 फरवरी 2025, बुधवार को मनाई जाएगी अचला सप्तमी।
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 4 फरवरी रात 10:42 बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त: 5 फरवरी रात 08:02 बजे
- सूर्योदय: सुबह 07:06 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:12 बजे
अचला सप्तमी व्रत की पूजा विधि
पूजन सामग्री
- लाल वस्त्र, लाल फूल, अक्षत
- तांबे का कलश, जल, दूध, शहद
- गुड़, लाल चंदन, धूप-दीप
- सूर्य देव का चित्र या मूर्ति
विधिवत पूजा विधि
- प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- साफ लाल वस्त्र धारण कर सूर्य मंत्र का जाप करें: “ॐ घृणि सूर्याय नमः”
- तांबे के कलश में जल, दूध, शहद और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें
- सूर्य देव की आरती करें और सूर्य चालीसा का पाठ करें
- दिन भर व्रत रखकर संध्या में फलाहार करें
विशेष मंत्र
इस दिन इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है:
“ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा”
अचला सप्तमी व्रत का महत्व
- सूर्य देव की कृपा से रोगों से मुक्ति मिलती है
- पितृ दोष और ग्रह दोषों का निवारण होता है
- संतान प्राप्ति और संतान सुख के लिए शुभ माना जाता है
- कुष्ठ, चर्म रोग और आंखों के रोग में लाभकारी
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
इस व्रत में सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा वैज्ञानिक रूप से भी लाभकारी है। सुबह के सूर्य की किरणें विटामिन-डी का अच्छा स्रोत हैं जो त्वचा और हड्डियों के लिए फायदेमंद होती हैं।
अचला सप्तमी की विशेष बातें
- इस दिन गुड़ और घी का दान करना चाहिए
- व्रत में नमक और तेल का सेवन वर्जित है
- सूर्यास्त के बाद अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए
- इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करें
निष्कर्ष
अचला सप्तमी का व्रत सूर्य देव की अनुपम कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। जैसे भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब को इस व्रत से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली, वैसे ही यह व्रत साधक को शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाता है। 5 फरवरी 2025 को इस पावन व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
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