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18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा अधिकमास: पुरुषोत्तम मास का महत्व
हिंदू पंचांग में अधिकमास या मलमास एक विशेष समय होता है जो हर तीन वर्ष में आता है। इस बार यह पवित्र माह 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2024 तक रहेगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि भगवान विष्णु ने स्वयं इस मास का स्वामित्व लिया था। आइए जानते हैं क्यों यह माहात्म्यपूर्ण है और कैसे इसका लाभ उठाएं।
अधिकमास क्या है?
हिंदू कैलेंडर चंद्रमा और सूर्य की गति पर आधारित है। चंद्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365 दिन) के बीच की खाई को पाटने के लिए हर 32-36 महीने में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं।
- इसे “मलमास” भी कहा जाता है, क्योंकि पारंपरिक रूप से इसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था।
- लेकिन भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह अत्यंत फलदायी माना गया है।
कैसे बना यह “पुरुषोत्तम मास”?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब अधिकमास को कोई देवता स्वीकार नहीं कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया:
- “यदि कोई तुम्हें नहीं चाहता, तो मैं तुम्हारा स्वामी बनता हूँ” – ऐसा कहकर विष्णु ने इस मास का नाम “पुरुषोत्तम” (सर्वश्रेष्ठ पुरुष) रखा।
- तब से यह मास विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है।
पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
1. पापों से मुक्ति का अवसर
शास्त्रों में कहा गया है कि इस माह में किया गया दान, जप, तप और पूजा अन्य समय की तुलना में अधिक फल देता है:
- गीता का पाठ या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप विशेष लाभकारी है।
- इस दौरान तुलसी पूजन और दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
2. व्रत और उपवास का विशेष फल
इस पूरे माह में एक समय भोजन (एकादशी की तरह) करने या सात्विक आहार लेने की सलाह दी जाती है:
- हर सोमवार श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- शुक्रवार को लक्ष्मी मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करें।
3. पितृ तर्पण का सुनहरा मौका
अधिकमास में पितरों को जल देने से वे प्रसन्न होते हैं:
- गंगाजल से तर्पण करना श्रेष्ठ है।
- पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और “ॐ पितृगणाय नमः” मंत्र बोलें।
इस अधिकमास में क्या करें?
प्रतिदिन के संकल्प
- सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं।
- घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें।
- रोज गीता का एक अध्याय पढ़ें या सुनें।
विशेष दिनों के अनुष्ठान
- 25 सितंबर (एकादशी): पद्मनाभा एकादशी – विष्णु जी के विशेष रूप की पूजा करें।
- 2 अक्टूबर (अमावस्या): पितृ तर्पण और दान का महत्वपूर्ण दिन।
- 10 अक्टूबर (अष्टमी): राधाष्टमी – भगवान कृष्ण की आराधना करें।
क्या न करें इस माह में?
चूंकि यह माह विशेष धार्मिक गतिविधियों के लिए है, कुछ बातों का ध्यान रखें:
- शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत न करें।
- तामसिक भोजन (मांस, मदिरा आदि) से परहेज करें।
- किसी भी प्रकार के विवाद या नकारात्मक विचार से बचें।
अधिकमास की विशेष पूजा विधि
पुरुषोत्तम मास पूजन
सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें:
- लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम स्थापित करें।
- पंचामृत से स्नान कराकर पीले फूल, तुलसी दल अर्पित करें।
- इस मंत्र का जाप करें: “ॐ पुरुषोत्तमाय नमः” (108 बार)
- अंत में केसर युक्त चावल (अक्षत) और मिष्ठान्न भोग लगाएं।
निष्कर्ष: आध्यात्मिक उन्नति का स्वर्णिम समय
यह पुरुषोत्तम मास हमें जीवन में आध्यात्मिकता को प्राथमिकता देने का संदेश देता है। जैसे भगवान विष्णु ने इस मास को ग्रहण किया, वैसे ही हमें भी इसका सदुपयोग करना चाहिए। 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक के इस पावन काल में थोड़ा समय निकालकर भक्ति, सेवा और सत्कर्म में लगाएं – यही इस लेख का सार है।
आप सभी को पुरुषोत्तम मास की हार्दिक शुभकामनाएं! मान्यता है कि इस लेख को साझा करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
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