अधिकमास: जानिए क्यों लगता है अधिकमास, सुख-समृद्धि पाने के लिए इसमें क्या करें और क्या न करें
हिंदू पंचांग में अधिकमास या पुरुषोत्तम मास एक विशेष महीना माना जाता है। यह महीना हर तीसरे साल आता है और इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस माह में किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। आइए, जानते हैं कि अधिकमास क्यों लगता है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखकर हम सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
अधिकमास क्या है और क्यों लगता है?
अधिकमास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है, जबकि सूर्य की गति से सौर वर्ष निर्धारित होता है। हर तीन साल में लगभग एक महीने का अंतर आ जाता है, जिसे पूरा करने के लिए अधिकमास जोड़ा जाता है।
धार्मिक महत्व
शास्त्रों में अधिकमास को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस महीने में व्रत, दान, पूजा-पाठ और साधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
अधिकमास में क्या करें?
अधिकमास में कुछ विशेष कार्य करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:
1. पूजा-पाठ और भक्ति
- प्रतिदिन श्रीमद्भागवत गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- भगवान विष्णु की आराधना करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
- घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए दीपक जलाएँ।
2. दान-पुण्य
- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
- पवित्र नदियों में स्नान करके तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है।
- ब्राह्मणों या साधु-संतों को भोजन कराएँ।
3. व्रत और संयम
- इस माह में एक समय भोजन करने का संकल्प लें।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करें।
- अनावश्यक यात्राओं और विवादों से बचें।
अधिकमास में क्या न करें?
अधिकमास में कुछ कार्यों से बचना चाहिए, क्योंकि इनका अशुभ प्रभाव पड़ सकता है:
1. शुभ कार्यों से परहेज
- इस महीने में विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण जैसे मंगल कार्य नहीं करने चाहिए।
- नए व्यापार या नौकरी की शुरुआत टाल दें।
2. नकारात्मक व्यवहार
- क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार से दूर रहें।
- अनावश्यक खर्च और फिजूलखर्ची से बचें।
3. अशुद्ध आहार
- तला-भुना, मसालेदार और बासी भोजन न खाएँ।
- ज्यादा नमक और चीनी का सेवन न करें।
अधिकमास में विशेष साधना
इस महीने में कुछ विशेष साधनाएँ करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है:
1. मंत्र जाप
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- “हरि ॐ तत्सत” का उच्चारण करके मन को शांत करें।
2. भजन और कीर्तन
- भगवान विष्णु के भजन गाएँ और कीर्तन में शामिल हों।
- संगीतमय प्रार्थना से मन को प्रसन्न रखें।
3. योग और ध्यान
- प्रतिदिन 15-20 मिनट ध्यान करें।
- सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करके शरीर को स्वस्थ रखें।
निष्कर्ष
अधिकमास एक पावन अवसर है जिसमें हमें अपने आध्यात्मिक जीवन को सुधारने का मौका मिलता है। इस महीने में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और संयम से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अधिकमास के नियमों का पालन करके हम अपने कर्मों का शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। आइए, इस पुरुषोत्तम मास का लाभ उठाएँ और भगवान विष्णु की कृपा पाएँ।
