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Ahoi Ashtami Vrat Katha: अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनकर मिले व्रत फल

Published June 26, 2026
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5 Min Read

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Contents
अहोई अष्टमी व्रत कथा: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन व्रतअहोई अष्टमी व्रत का महत्वअहोई अष्टमी व्रत कथाव्रत कथा का पूरा संस्करणअहोई अष्टमी व्रत विधिपूजा सामग्रीव्रत की विधिअहोई अष्टमी मंत्रअहोई अष्टमी व्रत के नियमअहोई अष्टमी व्रत का फलनिष्कर्ष

अहोई अष्टमी व्रत कथा: संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का पावन व्रत

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए किया जाता है। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस लेख में हम आपको अहोई अष्टमी व्रत कथा के साथ-साथ इसकी विधि, महत्व और पूजा सामग्री के बारे में विस्तार से बताएंगे।

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति और उनकी रक्षा के लिए किया जाता है। इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं।

  • यह व्रत करवा चौथ से चार दिन पहले आता है
  • इस दिन माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं
  • शाम को तारे दिखने के बाद पूजा करके व्रत खोला जाता है
  • अहोई माता की कृपा से संतान को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है

अहोई अष्टमी व्रत कथा

प्राचीन समय में एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। एक दिन बेटी अपनी भाभियों के साथ मिट्टी लेने गई। वहां उसने कोयल की तरह आवाज निकाली तो उसकी छोटी भाभी ने हंसी उड़ाई। इस पर नाराज होकर बेटी ने छुरी से भाभी का गला काट दिया।

जब साहूकार को यह बात पता चली तो उसने बेटी को घर से निकाल दिया। वन में भटकते हुए बेटी ने अहोई माता की पूजा की और पश्चाताप किया। माता ने प्रसन्न होकर उसके सभी भाइयों को जीवित कर दिया। तब से अहोई अष्टमी का व्रत मनाया जाने लगा।

व्रत कथा का पूरा संस्करण

एक गांव में एक स्त्री रहती थी जिसके सात बेटे थे। कार्तिक मास में वह अहोई माता की पूजा के लिए मिट्टी खोद रही थी। इस दौरान उसकी खुरपी से छोटे बच्चे वाले स्याहु (साही) की मौत हो गई।

इस पाप के प्रभाव से उसके सभी बेटों की मृत्यु हो गई। पश्चाताप करने पर अहोई माता ने उसे व्रत करने को कहा। व्रत करने से उसके सभी बेटे जीवित हो गए। तब से यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाने लगा।

अहोई अष्टमी व्रत विधि

पूजा सामग्री

  • अहोई माता का चित्र या कलश स्थापना
  • लाल कपड़ा
  • सिंदूर, चावल, फूल
  • मिठाई और फल
  • दीपक और घी
  • कलावा और चुनरी

व्रत की विधि

अहोई अष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। दीवार पर अहोई माता का चित्र लगाएं या कलश स्थापित करें।

शाम को तारे निकलने से पहले पूजा करें। अहोई माता की कथा सुनें और आरती उतारें। तारे दिखने के बाद जल ग्रहण करके व्रत खोलें। पूजा की सामग्री को किसी ब्राह्मण या गरीब को दान दें।

अहोई अष्टमी मंत्र

पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें:

“ॐ श्री अहोई मातायै नमः”

या फिर यह प्रार्थना करें:

“हे अहोई माता, हमारी संतान की रक्षा करो। उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु बनाओ। हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखो।”

अहोई अष्टमी व्रत के नियम

  • पूरे दिन निर्जला व्रत रखें
  • किसी को भी बुरा न देखें न सोचें
  • पूजा में सात्विक भाव रखें
  • शाम को तारे दिखने के बाद ही व्रत खोलें
  • व्रतकाल में क्रोध और झूठ से बचें

अहोई अष्टमी व्रत का फल

शास्त्रों के अनुसार जो माताएं श्रद्धापूर्वक अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं, उन्हें यह फल प्राप्त होता है:

  • संतान को दीर्घायु और स्वास्थ्य प्राप्त होता है
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
  • संतान संबंधी सभी कष्ट दूर होते हैं
  • माता की मनोकामना पूर्ण होती है
  • पारिवारिक समृद्धि में वृद्धि होती है

निष्कर्ष

अहोई अष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में संतान की रक्षा के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माताओं के लिए संतान के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करने का एक पावन अवसर है। अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनने और व्रत रखने से माताओं को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

आशा है यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा। अहोई माता आपकी संतान की रक्षा करें और आपके परिवार को सुख-समृद्धि प्रदान करें।

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