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अक्षय तृतीया 2025 आरती विष्णु लक्ष्मी प्रसन्न

अक्षय तृतीया 2025 पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने का शुभ मुहूर्त और विधि। जानें पूजा का महत्व, मंत्र और आशीर्वाद पाने का सही तरीका।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

अक्षय तृत5: परिचय एवं महत्व

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। सन 2025 में यह पावन पर्व 30 अप्रैल को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) फल देता है।

Contents
अक्षय तृत5: परिचय एवं महत्वक्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?अक्षय तृतीया पर आरती विधिआरती से पहले की तैयारीआरती के लिए सामग्रीश्री विष्णु-लक्ष्मी आरतीआरती के बोलआरती के बाद की विधिअक्षय तृतीया के विशेष मंत्रमहालक्ष्मी मंत्रविष्णु गायत्री मंत्रकुबेर मंत्र (धन प्राप्ति हेतु)अक्षय तृतीया के शुभ कार्यअक्षय तृतीया की कथानिष्कर्ष

क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?

  • इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था
  • महाभारत में वेद व्यास और गणेश जी ने इसी दिन महाभारत लिखना शुरू किया था
  • इस तिथि पर गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था

अक्षय तृतीया पर आरती विधि

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। आइए जानते हैं सही विधि:

आरती से पहले की तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • साफ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
  • लाल या पीले रंग का आसन बिछाएं

आरती के लिए सामग्री

  • तुलसी दल, पुष्प, अक्षत
  • दीपक (घी या तिल के तेल का)
  • धूप, दीप, नैवेद्य (मिष्ठान्न)
  • जल से भरा कलश
  • चंदन, रोली, मौली

श्री विष्णु-लक्ष्मी आरती

नीचे दी गई आरती को भक्तिभाव से गाएं और दीपक को घुमाते हुए भगवान को अर्पित करें:

आरती के बोल

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
तुम करो दीन की रक्षा, सुख सम्पत्ति देना॥

विष्णु प्रिया सुखदायिनी, ज्ञान विवेक देना।
नारायणी नरसिंही, भक्ति भाव देना॥

कमला कृष्णा कमनीया, तुम ही हो जगदंबा।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, चरण कमल रंभा॥

दास जन की सुनो लीजै, करो दया हे माता।
अक्षय तृतीया के दिन, तुम्हारी महिमा गाता॥

आरती के बाद की विधि

  • आरती के बाद भगवान को तुलसी दल अर्पित करें
  • पूजा में प्रयुक्त चरणामृत को परिवार में वितरित करें
  • भोग (नैवेद्य) को प्रसाद के रूप में बांटें
  • इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है

अक्षय तृतीया के विशेष मंत्र

इस पावन दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है:

महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्॥

कुबेर मंत्र (धन प्राप्ति हेतु)

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

अक्षय तृतीया के शुभ कार्य

इस दिन किए जाने वाले कुछ विशेष कार्य जो जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं:

  • स्वर्ण खरीदारी: इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है
  • नया व्यवसाय: कोई नया कार्य या व्यापार शुरू करना लाभदायक होता है
  • विवाह: इस दिन विवाह संस्कार करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है
  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, जल आदि का दान करें
  • तुलसी पूजन: तुलसी के पौधे की विशेष पूजा करें

अक्षय तृतीया की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सत्ययुग का प्रारंभ हुआ था। एक अन्य कथा के अनुसार जब महर्षि वेद व्यास ने महाभारत लिखनी शुरू की, तो उन्होंने गणेश जी से सहायता मांगी। गणेश जी ने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखते रहेंगे और व्यास जी को बिना रुके बोलना होगा। इस प्रकार इस दिन से महाभारत की रचना प्रारंभ हुई।

निष्कर्ष

अक्षय तृतीया का पर्व हमें सिखाता है कि शुभ कर्मों का फल कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। अक्षय तृतीया 2025 के इस पावन अवसर पर उपरोक्त आरती और मंत्रों का पाठ करके आप भी दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कर्म आपके जीवन में अक्षय सुखों का भंडार बन जाता है।

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