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Ayodhya Ram Mandir: रामलला बालस्वरूप में विराजेंगे पुरानी मूर्ति का क्या होगा

बालस्वरूप में विराजेंगे रामलला जानिए पुरानी मूर्ति का क्या होगा अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह में

Published July 2, 2026
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4 Min Read

अयोध्या नगरी आज पूरे विश्व के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। श्रीरामलला का भव्य मंदिर अब पूर्णता की ओर अग्रसर है, और जनवरी 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा का पावन अवसर आने वाला है। इस ऐतिहासिक घटना के साथ ही एक प्रश्न भक्तों के मन में उठ रहा है – “पुरानी मूर्ति का क्या होगा?”

Contents
गर्भगृह में विराजेंगे बालरूप में श्रीरामकैसी होगी नई मूर्ति?पुरानी मूर्ति का क्या होगा?मंदिर निर्माण से जुड़ी रोचक बातेंशिल्प एवं वास्तुकलापवित्र सामग्री का उपयोगभक्तों के लिए दर्शन व्यवस्थाप्राण-प्रतिष्ठा समारोहनियमित दर्शनआध्यात्मिक महत्वरामलला के बालरूप का रहस्यअयोध्या का पुनरुत्थानएक नए युग का आरंभ

इस लेख में हम आपको बताएंगे:

  • गर्भगृह में स्थापित होने वाली बालस्वरूप रामलला की नई मूर्ति के विषय में
  • वर्तमान में पूजित पुरानी मूर्ति का भविष्य
  • मंदिर निर्माण से जुड़ी रोचक जानकारियां
  • भक्तों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था

गर्भगृह में विराजेंगे बालरूप में श्रीराम

कैसी होगी नई मूर्ति?

श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम के 5 वर्षीय बालस्वरूप की मूर्ति स्थापित की जाएगी। यह मूर्ति कृष्ण शिला (काला पत्थर) से निर्मित है और इसे मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने तैयार किया है।

मूर्ति की विशेषताएं:

  • 51 इंच ऊंची
  • भगवान राम का मुकुटधारी बालरूप
  • दाहिने हाथ में धनुष और बाएं हाथ में बाण
  • मुखमंडल पर दिव्य तेज एवं मंद मुस्कान

पुरानी मूर्ति का क्या होगा?

वर्ष 1949 से अस्थायी रामलला मंदिर में विराजमान पुरानी मूर्ति को नए मंदिर परिसर में ही एक विशेष स्थान दिया जाएगा। यह मूर्ति भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है क्योंकि:

  • यह स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मूर्ति है
  • 6 दिसंबर 1949 की रात्रि में रामलला यहाँ प्रकट हुए थे
  • करीब 74 वर्षों से निरंतर पूजा अर्चना हो रही है

मंदिर निर्माण से जुड़ी रोचक बातें

शिल्प एवं वास्तुकला

श्रीराम मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया जा रहा है। मुख्य मंदिर की ऊंचाई 161 फीट होगी और यह तीन मंजिला होगा। गर्भगृह के ऊपर शिखर बनाया जाएगा जिस पर स्वर्ण कलश स्थापित किया जाएगा।

पवित्र सामग्री का उपयोग

मंदिर निर्माण में विशेष सामग्री का प्रयोग किया गया है:

  • निर्माण के लिए रामेश्वरम से लाई गई पवित्र रेत
  • कावेरी नदी के जल से मिश्रित स्पेशल मोर्टार
  • गर्भगृह की दीवारों पर रामायण के दृश्य उकेरे जाएंगे

भक्तों के लिए दर्शन व्यवस्था

प्राण-प्रतिष्ठा समारोह

जनवरी 2024 में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान:

  • वैदिक रीति से मूर्ति स्थापना
  • 108 कलशों से अभिषेक
  • संपूर्ण अयोध्या में रामधुनियाँ गूंजेंगी

नियमित दर्शन

मंदिर पूर्ण होने के बाद भक्तों के लिए:

  • प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन
  • विशेष अभिषेक एवं आरती की व्यवस्था
  • ऑनलाइन पास के माध्यम से दर्शन बुकिंग

आध्यात्मिक महत्व

रामलला के बालरूप का रहस्य

बालक राम का स्वरूप भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है। शास्त्रों में कहा गया है:

“बालकृष्णं बालरामं, बालभावेन पूजयेत्।
यस्य प्रसादात् भक्तस्य, बालभावः प्रजायते॥”

अर्थात: “बालकृष्ण और बालराम की बालभाव से पूजा करनी चाहिए। उनकी कृपा से भक्त के हृदय में बालभाव उत्पन्न होता है।”

अयोध्या का पुनरुत्थान

इस मंदिर के निर्माण से:

  • अयोध्या अपना प्राचीन गौरव पुनः प्राप्त करेगी
  • भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रसार होगा
  • रामराज्य की आदर्श अवधारणा साकार होगी

एक नए युग का आरंभ

श्रीराम मंदिर का निर्माण केवल एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। जब रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजेंगे, तो यह संपूर्ण विश्व के लिए शांति, समृद्धि और धर्म की विजय का संदेश होगा।

“रामो विग्रहवान् धर्मः” – (श्रीराम ही धर्म के साकार स्वरूप हैं)

भक्तजनों से अनुरोध है कि वे इस पावन अवसर पर राम नाम का जप करें और अपने हृदय में श्रीराम के बालस्वरूप को स्थान दें। जय श्रीराम!

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