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Bhadrapada Month 2025: भाद्रपद मास तारीख नियम व्रत त्योहार

भाद्रपद मास 2025 की तिथियाँ, नियम और व्रत-त्योहारों की पूरी जानकारी। जानें इस पवित्र महीने का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त। आस्था और परंपरा से जुड़ें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

भाद्रपद मास 2025: पवित्रता और आध्यात्मिकता का महीना

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीनों में से एक है। यह मास भगवान कृष्ण की भक्ति, व्रत-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों से भरपूर होता है। 2025 में भाद्रपद मास की शुरुआत 23 अगस्त 2025 से होगी और यह 21 सितंबर 2025 तक चलेगा। आइए जानते हैं इस पावन माह के नियम, व्रत-त्योहार और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
भाद्रपद मास 2025: पवित्रता और आध्यात्मिकता का महीनाभाद्रपद मास का धार्मिक महत्वभाद्रपद मास 2025 की महत्वपूर्ण तिथियाँभाद्रपद मास के नियम और विधियाँभाद्रपद मास के प्रमुख व्रत और त्योहार1. जन्माष्टमी2. हरतालिका तीज3. नाग पंचमीभाद्रपद मास में करने योग्य धार्मिक कार्यनिष्कर्ष

भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में भाद्रपद मास को “भादो” या “भाद्रपद” कहा जाता है। यह मास भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसके अलावा, इस माह में कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार भी मनाए जाते हैं।

  • पितृ पक्ष: भाद्रपद की कृष्ण पक्ष को पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है, जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है।
  • कृष्ण जन्माष्टमी: इस माह की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है।
  • हरतालिका तीज: भाद्रपद की तृतीया तिथि को माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।

भाद्रपद मास 2025 की महत्वपूर्ण तिथियाँ

2025 में भाद्रपद मास के दौरान पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की तिथियाँ निम्नलिखित हैं:

  • हरियाली तीज: 26 अगस्त 2025 (सोमवार)
  • नाग पंचमी: 30 अगस्त 2025 (शनिवार)
  • जन्माष्टमी: 6 सितंबर 2025 (शनिवार)
  • अमावस्या (पितृ पक्ष आरंभ): 21 सितंबर 2025 (रविवार)

भाद्रपद मास के नियम और विधियाँ

भाद्रपद मास में कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है ताकि इसका पूर्ण लाभ मिल सके:

  • सात्विक आहार: इस माह में मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • दान-पुण्य: गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करने का विशेष महत्व है।
  • मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ श्री कृष्णाय नमः” का नियमित जाप करें।

भाद्रपद मास के प्रमुख व्रत और त्योहार

1. जन्माष्टमी

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है।

2. हरतालिका तीज

यह त्योहार विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

3. नाग पंचमी

नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। इस दिन दूध और फूल चढ़ाकर नागों को प्रसन्न किया जाता है ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

भाद्रपद मास में करने योग्य धार्मिक कार्य

  • पितृ तर्पण: पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को जल अर्पित करना चाहिए।
  • भगवद् कथा श्रवण: इस माह में श्रीमद्भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व है।
  • गो सेवा: गायों को हरा चारा और रोटी खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

भाद्रपद मास हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण समय है। इस माह में व्रत, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्त अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकते हैं। 23 अगस्त 2025 से शुरू हो रहे इस मास में भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए नियमित पूजा-पाठ और सात्विक जीवन शैली अपनाएं।

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