# Bhishma Ashtami 2025: भीष्म अष्टमी आज, जानें पितामह ने युधिष्ठिर को दिए थे जीवन के कौन से मूल मंत्र
भीष्म अष्टमी का महत्व और पौराणिक पृष्ठभूमि
भीष्म अष्टमी हिंदू धर्म में एक विशेष तिथि है जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस दिन महाभारत के महान पात्र पितामह भीष्म ने अपने शरीर का त्याग किया था। उन्होंने अपनी इच्छा से मृत्यु को प्राप्त किया, जिसे “इच्छामृत्यु” का वरदान प्राप्त था।
भीष्म पितामह की वीरता और त्याग
- भीष्म ने अपने पिता की खुशी के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया।
- हस्तिनापुर की रक्षा के लिए उन्होंने अनेक युद्ध लड़े।
- कुरुक्षेत्र के युद्ध में वे धर्म की रक्षा के लिए खड़े रहे।
युधिष्ठिर को भीष्म के उपदेश: जीवन के मूल मंत्र
महाभारत युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर मनोवैज्ञानिक संकट से गुजर रहे थे, तब भीष्म पितामह ने उन्हें राजधर्म, नीति और जीवन प्रबंधन के गूढ़ सूत्र दिए। ये उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं।
1. धर्म का सही अर्थ समझें
भीष्म ने कहा –
“धर्मस्य तत्त्वं निहितं गुहायाम्” (महाभारत)
अर्थात, धर्म का सार गहन विवेक में छिपा है। बाहरी आडंबरों से धर्म नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और करुणा से मार्गदर्शन मिलता है।
2. शासक के लिए आवश्यक गुण
- न्यायप्रियता: प्रजा के साथ समान व्यवहार
- धैर्य: संकट में भी विवेक न खोना
- विनम्रता: अहंकार से मुक्त रहना
3. गृहस्थ जीवन का संतुलन
भीष्म ने समझाया कि अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं –
- अत्यधिक संपत्ति लोभ पैदा करती है
- अति तपस्या स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती है
- संयमित आचरण ही सुखद जीवन का आधार है
भीष्म अष्टमी 2025: पूजा विधि और महत्व
पूजा की सही विधि
- प्रातः स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें
- भीष्म की याद में तर्पण (जल अर्पण) करें
- गीता के 18वें अध्याय का पाठ करें
- ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें
क्यों मनाते हैं भीष्म अष्टमी?
- भीष्म की तपस्या और समर्पण को याद करने के लिए
- जीवन में धर्म और कर्तव्य का पालन सीखने के लिए
- पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए
भीष्म के उपदेशों की आधुनिक प्रासंगिकता
आज के तनावपूर्ण जीवन में भीष्म के ये सूत्र मार्गदर्शक हैं –
नेतृत्व के सूत्र
- टीम को प्रोत्साहित करें, डराकर नहीं
- निर्णय लेते समय दीर्घकालीन प्रभाव सोचें
व्यक्तिगत विकास
“अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते” (रामायण)
भीष्म भी यही शिक्षा देते हैं – ईमानदारी और सादगी ही सच्चा सुख देती है।
निष्कर्ष: भीष्म अष्टमी का संदेश
भीष्म पितामह ने जो ज्ञान दिया, वह केवल धार्मिक नहीं बल्कि व्यावहारिक जीवन शिक्षा है। इस अष्टमी पर हम उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें –
- कर्तव्यपालन सर्वोपरि
- अन्याय के सामने न झुकें
- जीवन में संतुलन बनाए रखें
भीष्म अष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! आइए, पितामह के जीवन मंत्रों को आत्मसात करें।
(श्लोकों की पुष्टि गीता प्रेस संस्करण से की गई है)
