MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: Bhishma Panchak 4 Nov se janiye vidhi aur mahatva
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

Bhishma Panchak 4 Nov se janiye vidhi aur mahatva

Published June 26, 2026
Share
5 Min Read

# Bhishma Panchak: 4 नवंबर से शुरू हो रही है भीष्म पंचक, जानिए इसकी विधि और महत्व

Contents
भीष्म पंचक क्या है?भीष्म पंचक की पौराणिक कथाभीष्म पंचक का महत्वभीष्म पंचक व्रत की विधि1. स्नान और संकल्प2. पूजा विधान3. दान और सेवा4. उपवास और भोजनभीष्म पंचक के विशेष नियमभीष्म पंचक व्रत के लाभनिष्कर्ष

भीष्म पंचक क्या है?

भीष्म पंचक हिंदू धर्म में एक पवित्र पाँच दिवसीय उपवास और व्रत का समय होता है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इस वर्ष, यह 4 नवंबर से शुरू होकर 8 नवंबर तक चलेगा। इस अवधि में भगवान विष्णु और महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह की पूजा की जाती है।

भीष्म पंचक की पौराणिक कथा

महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया और कभी विवाह नहीं किया। युद्ध के दौरान, उन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था, लेकिन वे सूर्य के उत्तरायण होने तक शरशैया पर लेटे रहे। कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक के इन पाँच दिनों में उन्होंने श्रीकृष्ण से भगवद् गीता का उपदेश सुना और अंत में मोक्ष प्राप्त किया। इसीलिए, इन पाँच दिनों को भीष्म पंचक के रूप में मनाया जाता है।

भीष्म पंचक का महत्व

इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है:

  • पितृ दोष से मुक्ति: इस व्रत को करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।
  • आयु और स्वास्थ्य लाभ: भीष्म पितामह की तरह दीर्घायु और बल प्राप्त होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत से मनुष्य को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
  • भगवान विष्णु की कृपा: इस समय विष्णु भगवान की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

भीष्म पंचक व्रत की विधि

इस पवित्र व्रत को करने की सरल विधि इस प्रकार है:

1. स्नान और संकल्प

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • व्रत का संकल्प लें: “मैं भीष्म पंचक व्रत का पालन करके भगवान विष्णु और भीष्म पितामह को प्रसन्न करना चाहता/चाहती हूँ।”

2. पूजा विधान

  • तुलसी के पास दीपक जलाएँ और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भीष्म पितामह के निमित्त जल, फूल और तिल अर्पित करें।
  • इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, भीष्माय पितामहाय नमः।”

3. दान और सेवा

  • ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न दान दें।
  • गायों को हरा चारा खिलाएँ।
  • तुलसी की सेवा करें और उसकी पूजा करें।

4. उपवास और भोजन

  • इन पाँच दिनों में सात्विक भोजन करें या फलाहार लें।
  • प्याज, लहसुन और मांसाहार का त्याग करें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन करके समय बिताएँ।

भीष्म पंचक के विशेष नियम

इस व्रत को करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखें:

  • सत्य बोलें: झूठ या कटु वचन न बोलें।
  • क्रोध से बचें: मन को शांत रखें और धैर्य बनाए रखें।
  • दया भाव: जीव-जंतुओं के प्रति दया दिखाएँ।
  • भक्ति भाव: पूजा में मन लगाकर भगवान का स्मरण करें।

भीष्म पंचक व्रत के लाभ

इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने वाले भक्तों को यह लाभ मिलते हैं:

  • पितृ दोष और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं और घर में सुख-शांति आती है।
  • संतान प्राप्ति के इच्छुक दंपत्तियों की मनोकामना पूरी होती है।
  • मनुष्य को जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।

निष्कर्ष

भीष्म पंचक का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मनुष्य को आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग भी दिखाता है। इस वर्ष 4 नवंबर से शुरू हो रहे इस पावन अवसर पर सभी भक्तजन इस व्रत को करके भगवान विष्णु और भीष्म पितामह का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

“यह व्रत सच्चे मन से करने पर ही फलदायी होता है। भक्ति और समर्पण के साथ इसे करें, ईश्वर आपकी सभी मनोकामनाएँ पूरी करेंगे।”

इस लेख को अपने प्रियजनों के साथ साझा करें और उन्हें भी इस पुण्य काल के बारे में जागरूक करें। हरि ओम!

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

नए साल का आगमन बुधवार से ऐसे करें शुरुआत

सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की विदाई

गणेश जी के हाथ में दांत क्यों रखते हैं जानकर हैरान रह जाएंगे

गंगाजल के फायदे और घर की समस्याओं का समाधान

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality June 26, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality June 26, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality June 26, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality June 26, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

June 26, 2026

Ramadan 2025 Sehri Iftar Time 05 April सहरी इफ्तार समय

June 26, 2026

Easter Sunday 2025 ईस्टर संडे का महत्व और मनाने का तरीका

June 26, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?