# Chhath Puja 2025: छठ महापर्व आज, इस शुभ मुहूर्त में दें सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य
छठ पूजा: सूर्य उपासना का महापर्व
प्रकृति और ईश्वर के प्रति समर्पण का अनुपम त्योहार छठ पूजा भारत के सबसे पवित्र और कठिन व्रतों में से एक है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। 2025 में छठ पूजा का यह पावन अवसर [तिथि] को मनाया जाएगा, जब भक्त सूर्यदेव और छठी मैया को अर्घ्य देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
छठ पूजा का धार्मिक महत्व
सूर्योपासना का वैदिक संदर्भ
वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा और समस्त ऊर्जा का स्रोत माना गया है। छठ पूजा में सूर्य की उपासना का विधान निम्न मंत्र से प्रारंभ होता है:
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”
(ऋग्वेद 10.37.4)
पौराणिक कथाएँ
- रामायण काल: मान्यता है कि भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने पर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना की थी।
- महाभारत प्रसंग: कर्ण (सूर्यपुत्र) प्रतिदिन जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे, जो आज के छठ अनुष्ठान का आधार है।
छठ पूजा 2025 का शुभ मुहूर्त
संध्या अर्घ्य: [तिथि], शाम [समय] से [समय] तक
उषा अर्घ्य: [तिथि], सुबह [समय] से [समय] तक
क्यों है यह समय विशेष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य की किरणों में विशेष उपचारात्मक शक्ति होती है। वैज्ञानिक शोध भी मानते हैं कि सूर्योदय/अस्त के समय सूर्य की रोशनी से विटामिन डी का अवशोषण सर्वोत्तम होता है।
छठ पूजा की विधि (Step-by-Step)
दिन 1: नहाय-खाय (कार्तिक शुक्ल चतुर्थी)
- सूर्योदय से पूर्व स्नान कर शुद्ध आहार (कद्दू-चना दाल, लौकी की सब्जी) ग्रहण करें
- घर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान
दिन 2: खरना (पंचमी)
- पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनाया जाता है
- इस प्रसाद को केवल पूजा के बाद ही ग्रहण किया जाता है
दिन 3: संध्या अर्घ्य (षष्ठी)
विशेष सामग्री:
- बाँस की टोकरी (दउरा) में ठेकुआ, फल, नारियल
- सूप, दीपक, गंगाजल
मंत्र:
“सूर्य देव नमस्तुभ्यं, प्रसीद मम भक्तितः।
पुत्र-पौत्र-धन-धान्यं, देहि मे त्वं नमोऽस्तु ते॥”
दिन 4: उषा अर्घ्य (सप्तमी)
- सूर्योदय से पूर्व नदी/तालाब के किनारे जल में खड़े होकर अर्घ्य देना
- व्रत का पारण (समापन) कर प्रसाद वितरण
छठ घाटों की तैयारियाँ
2025 में प्रमुख शहरों के घाटों पर विशेष व्यवस्थाएँ:
- पटना: गांधी घाट, गायघाट पर LED लाइटिंग और सफाई अभियान
- वाराणसी: अस्सी घाट पर फूलों से सजावट
- दिल्ली: यमुना नदी किनारे अस्थायी घाट निर्माण
सामाजिक महत्व
- स्त्री-पुरुष समान रूप से भाग लेते हैं
- जाति-धर्म के भेद से परे सामूहिक उत्सव
- पर्यावरण संरक्षण का संदेश (प्राकृतिक जलस्रोतों की शुद्धि)
सावधानियाँ
- भीड़भाड़ वाले घाटों पर बच्चों को संभालकर रखें
- प्लास्टिक का उपयोग न करें
- नदी में प्रवेश करते समय गहरे पानी से सावधान रहें
छठी मैया की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय
- छठ व्रत कथा का पाठ करें
- गरीबों को प्रसाद वितरित करें
- पूजा सामग्री में हल्दी, सुपारी और साठी के चावल अवश्य रखें
“जो भक्ति भाव से छठ मैया की आराधना करता है, उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।”
निष्कर्ष
छठ पूजा का यह पावन पर्व हमें प्रकृति और दिव्य शक्तियों के साथ सामंजस्य बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। 2025 में इस शुभ अवसर पर सूर्यदेव की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे, यही हमारी कामना है।
छठ मैया की जय! सूर्य देवता को कोटि-कोटि नमन!
(नोट: तिथियाँ और समय 2025 के कैलेंडर के अनुसार अपडेट करें। मंत्रों की शुद्धता के लिए किसी विद्वान पंडित से सत्यापन करें।)
