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Dattatreya Jayanti 2025 दत्तात्रेय जयंती ब्रह्मा विष्णु महेश रूप

दत्तात्रेय जयंती 2025: जानें भगवान दत्तात्रेय की महिमा, पूजा विधि और महत्व, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के सम्मिलित रूप हैं। आज ही इस दिव्य पर्व का लाभ उठाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

दत्तात्रेय जयंती 2025: त्रिदेवों का एकात्म स्वरूप

भारतीय संस्कृति में दत्तात्रेय जयंती का विशेष महत्व है। यह पर्व मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो इस बार 12 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का सम्मिलित अवतार माना जाता है, जो ज्ञान, भक्ति और त्याग का प्रतीक हैं। आइए जानते हैं इस दिव्य अवतार की महिमा और पूजन विधि।

Contents
दत्तात्रेय जयंती 2025: त्रिदेवों का एकात्म स्वरूपभगवान दत्तात्रेय कौन हैं?दत्तात्रेय जयंती का महत्वपौराणिक कथादत्तात्रेय जयंती 2025 पूजन विधिसुबह की तैयारीमुख्य पूजा विधिविशेष आरतीदत्तात्रेय जयंती पर विशेष उपायध्यान रखने योग्य बातेंदत्तात्रेय जयंती का आध्यात्मिक संदेश24 गुरुओं की कथानिष्कर्ष

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?

पुराणों के अनुसार, दत्तात्रेय ऋषि अत्रि और माता अनुसूया की संतान हैं। उनके नाम का अर्थ है:

  • दत्त – जिन्हें भगवान ने स्वयं को अर्पित किया
  • आत्रेय – ऋषि अत्रि के पुत्र

वे त्रिमूर्ति का एकीकृत स्वरूप हैं:

  • ब्रह्मा ज्ञान प्रदाता
  • विष्णु पालनकर्ता
  • शिव संहारकर्ता

दत्तात्रेय जयंती का महत्व

इस दिन भगवान दत्तात्रेय की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। शास्त्रों में बताया गया है कि:

  • इस दिन की गई भक्ति से त्रिदोषों (काम, क्रोध, लोभ) का नाश होता है
  • साधक को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है
  • 24 गुरुओं से शिक्षा लेने की प्रेरणा मिलती है

पौराणिक कथा

एक प्रसंग के अनुसार, जब त्रिदेवों ने माता अनुसूया की पतिव्रता धर्म की परीक्षा ली, तब उनकी महिमा से प्रसन्न होकर तीनों देवताओं ने दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया।

दत्तात्रेय जयंती 2025 पूजन विधि

इस वर्ष 12 दिसंबर को निम्न विधि से पूजा करें:

सुबह की तैयारी

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • लाल या पीले कपड़े पर दत्तात्रेय यंत्र स्थापित करें

मुख्य पूजा विधि

  • दत्तात्रेय की मूर्ति/चित्र पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं
  • फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें
  • घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
  • निम्न मंत्र का 108 बार जप करें:

“ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः”

विशेष आरती

पूजन के बाद यह आरती अवश्य गाएं:

“जय दत्तात्रेय स्वामी, जय दत्तात्रेय
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांग धारे…”

दत्तात्रेय जयंती पर विशेष उपाय

इस पावन अवसर पर यह विशेष कार्य करने चाहिए:

  • गरीबों को भोजन दान करें – विशेषकर साधु-संतों को
  • पीपल के वृक्ष के नीचे दीप दान करें
  • मौन व्रत रखकर “दत्त गीता” का पाठ करें
  • चावल, गुड़ और घी का दान करें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस दिन किसी भी प्राणी को कष्ट न दें
  • क्रोध और झूठ से बचें
  • सात्विक भोजन ही ग्रहण करें

दत्तात्रेय जयंती का आध्यात्मिक संदेश

भगवान दत्तात्रेय हमें यह शिक्षा देते हैं:

  • प्रकृति से सीखने की प्रवृत्ति विकसित करें
  • सरल जीवन और उच्च विचार अपनाएं
  • ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संतुलन बनाए रखें

24 गुरुओं की कथा

दत्तात्रेय ने 24 गुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया था, जिनमें पृथ्वी, जल, अग्नि, चंद्रमा, कबूतर, मधुमक्खी आदि शामिल हैं। यह हमें सिखाता है कि ज्ञान कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है।

निष्कर्ष

दत्तात्रेय जयंती 2025 का यह पावन अवसर हमें आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। त्रिदेवों के इस अद्भुत अवतार की कृपा पाने के लिए हमें सच्चे मन से भक्ति भाव रखना चाहिए। आइए, इस दिन संकल्प लें कि हम जीवन में ज्ञान, संयम और सेवा भाव को अपनाएंगे।

ॐ श्री गुरु दत्तात्रेयाय नमः

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