हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) इनमें सबसे पवित्र मानी जाती है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 5 नवंबर 2025 (बुधवार)
- एकादशी व्रत समाप्ति: 6 नवंबर सुबह 6:42 बजे तक
- पारण मुहूर्त: 6 नवंबर सुबह 6:42 से 8:58 बजे तक
क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दिन उनकी निद्रा समाप्त होती है और वे पृथ्वी के कल्याण के लिए फिर से सक्रिय होते हैं। इसलिए इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है।
देवउठनी एकादशी के खास उपाय
1. प्रातःकाल स्नान और संकल्प
सुबह जल्दी उठकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इस मंत्र का उच्चारण करें:
“मम सर्वपापक्षयपूर्वक परमेश्वरप्रीत्यर्थं देवोत्थान एकादशी व्रतमहं करिष्ये।”
2. तुलसी-शालिग्राम की पूजा
- तुलसी के पौधे के नीचे शालिग्राम स्थापित करें।
- तुलसी को जल चढ़ाएं और उनकी परिक्रमा करें।
- इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
3. दीपदान का महत्व
शाम के समय तुलसी के पास या मंदिर में घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय यह प्रार्थना करें:
“दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”
4. अन्नदान और दान-पुण्य
इस दिन गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। दान करते समय यह मंत्र बोलें:
“इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदम्।
समूढमस्य पांसुरे॥”
देवउठनी एकादशी व्रत कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार राजा हरिश्चंद्र को ऋषि विश्वामित्र ने अपना सब कुछ दान करने के लिए कहा। राजा ने सच्ची निष्ठा से अपना राजपाट, धन और परिवार तक दान कर दिया। अंत में वे एक चांडाल के यहां नौकरी करने लगे। उनकी पत्नी को भी बेच दिया गया। एक दिन उन्होंने अपने ही पुत्र को सर्पदंश से मरते देखा, पर धैर्य नहीं खोया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें उनका खोया हुआ राज्य व परिवार लौटा दिया। यह घटना देवउठनी एकादशी के दिन ही हुई थी।
विशेष सावधानियाँ
- इस दिन चावल, मसूर की दाल और मांसाहार का सेवन वर्जित है।
- क्रोध, झूठ और किसी का अपमान न करें।
- रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें।
भगवान विष्णु की कृपा पाने का अवसर
देवउठनी एकादशी का पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और धैर्य से हर संकट का समाधान होता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी भगवान विष्णु की शरण में जाएं और उनकी असीम कृपा प्राप्त करें।
“शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥”
