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Devuthani Ekadashi 2025: 14 नवंबर को जागेंगे श्रीविष्णु

14 नवंबर 2025 को Devuthani Ekadashi पर जानें श्रीविष्णु के जागने का महत्व, सही पूजा विधि और शुभ मंत्र। इस पावन दिन के व्रत और आराधना से मिलेगा मोक्ष और समृद्धि का आशीर्वाद।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की जागृति का पावन पर्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और देवउठनी एकादशी इनमें से सबसे पवित्र मानी जाती है। 14 नवंबर 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व के साथ भगवान विष्णु की चार माह की योगनिद्रा समाप्त होती है। इस दिन से ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व, पूजन विधि और मंत्रों के बारे में विस्तार से।

Contents
Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की जागृति का पावन पर्वदेवउठनी एकादशी का महत्वपौराणिक कथादेवउठनी एकादशी 2025 की पूजा विधिसुबह की तैयारीविशेष पूजन सामग्रीपूजन विधिदेवउठनी एकादशी के विशेष मंत्रमुख्य मंत्रविष्णु गायत्री मंत्रएकादशी व्रत मंत्रदेवउठनी एकादशी व्रत कथाविशेष सावधानियांनिष्कर्ष

देवउठनी एकादशी का महत्व

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं। यह पर्व भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है:

  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत को रखने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • शुभ कार्यों की शुरुआत: इस दिन से विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
  • देवताओं का आशीर्वाद: भगवान विष्णु के जागने के साथ ही सभी देवी-देवता भी सक्रिय हो जाते हैं।

पौराणिक कथा

शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले गए थे। देवी लक्ष्मी ने उन्हें जगाने के लिए इसी दिन विशेष पूजा की थी। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि इस दिन जो भी भक्त सच्चे मन से व्रत रखेगा, उसके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।

देवउठनी एकादशी 2025 की पूजा विधि

इस पवित्र दिन पर विधि-विधान से पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां है पूजन की संपूर्ण विधि:

सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और फूलों से सजाएं।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को कुमकुम, चंदन और अक्षत से सजाएं।

विशेष पूजन सामग्री

  • तुलसी दल: विष्णु पूजन में तुलसी का विशेष महत्व है
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना मिश्रण
  • केले के पत्ते: भोग लगाने के लिए
  • दीपक: घी का दीपक जलाएं

पूजन विधि

  1. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें
  2. फिर भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं
  3. नए वस्त्र, फूल माला और तुलसी दल अर्पित करें
  4. धूप-दीप दिखाकर भोग लगाएं
  5. विष्णु सहस्रनाम या नीचे दिए मंत्रों का जाप करें

देवउठनी एकादशी के विशेष मंत्र

इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:

मुख्य मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

विष्णु गायत्री मंत्र

“ॐ नारायणाय विद्महे
वासुदेवाय धीमहि
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्”

एकादशी व्रत मंत्र

“मम सर्वकामना पूर्तये एकादशी व्रतमहं करिष्ये”

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

इस दिन व्रत कथा सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। संक्षिप्त कथा इस प्रकार है:

प्राचीन काल में एक राजा थे जिन्होंने अनजाने में एकादशी का व्रत भंग कर दिया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए ऋषियों ने उन्हें देवउठनी एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत करने से राजा के सभी पाप धुल गए और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

विशेष सावधानियां

  • चावल न खाएं: एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है
  • सात्विक भोजन: फलाहार या सात्विक भोजन ही ग्रहण करें
  • क्रोध से बचें: पूरे दिन मन को शांत रखें
  • दान का महत्व: इस दिन अन्न, वस्त्र या दीपक दान करना शुभ माना जाता है

निष्कर्ष

देवउठनी एकादशी भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। 14 नवंबर 2025 को इस पावन पर्व को श्रद्धापूर्वक मनाकर आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं। विधि-विधान से व्रत रखकर और भगवान विष्णु की आराधना करके इस पर्व का पूर्ण लाभ उठाएं।

भगवान विष्णु की कृपा सदैव आप पर बनी रहे! हरि ॐ!

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