हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और देवोत्थान एकादशी (जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं) सबसे पवित्र मानी जाती है। यह वह पावन दिन है जब भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। 2025 में यह पर्व 2 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखकर भक्त भगवान विष्णु की कृपा पाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
देवोत्थान एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर 2025, शाम 06:42 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2025, शाम 05:06 बजे
- पारण समय (व्रत तोड़ने का शुभ समय): 3 नवंबर, सुबह 06:45 से 08:59 बजे तक
देवोत्थान एकादशी की पौराणिक कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने दैत्यों का वध करने के लिए चार महीने की गहरी निद्रा ली। जब वे जागे, तो देवी लक्ष्मी ने उनके शयन का उत्सव मनाया। तभी से देवोत्थान एकादशी पर विष्णु जी की पूजा करके उन्हें जगाने की परंपरा शुरू हुई।
क्या करें इस दिन?
- प्रातः स्नान: सूर्योदय से पहले गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
- व्रत संकल्प: “मैं भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए व्रत रखता/रखती हूँ” कहकर संकल्प लें।
- तुलसी-शालिग्राम विवाह: इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम का विवाह कराना अति शुभ माना जाता है।
- भजन-कीर्तन: “हरे कृष्ण हरे राम” या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
भूलकर भी न करें ये 5 कार्य
1. अन्न ग्रहण न करें
एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दालें आदि नहीं खाना चाहिए। फलाहार या साबुदाना, मखाने का सेवन कर सकते हैं।
2. क्रोध या झूठ से बचें
इस दिन मन शुद्ध रखें। किसी को बुरा-भला कहने से व्रत का फल नष्ट होता है।
3. तुलसी को न छुएं बिना स्नान किए
तुलसी जी को स्पर्श करने से पहले हाथ-पैर धो लें, वरना अपवित्रता मानी जाती है।
4. द्वादशी पर सही समय पर पारण करें
व्रत तोड़ने में देरी करने से पुण्य कम होता है। सूर्योदय के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
5. निंदा या आलस्य न करें
इस दिन भजन-पूजन में समय बिताएं। टीवी या व्यर्थ की बातें करने से बचें।
विशेष पूजा विधि
- सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर में विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- तुलसी दल, फूल, धूप-दीप से पूजा करें।
- नीचे दिए मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
क्या है शास्त्रों में वर्णन?
स्कन्द पुराण (विष्णु खंड) में कहा गया है:
“एकादश्यां नरो यस्तु भक्त्या विष्णुं समर्चयेत्।
सर्वपापविनिर्मुक्तः स विष्णोः सायुज्यं व्रजेत्॥”
अर्थात: जो व्यक्ति एकादशी को भक्तिपूर्वक विष्णु जी की पूजा करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर भगवान के धाम को प्राप्त करता है।
आध्यात्मिक जागरण का पर्व
देवोत्थान एकादशी सिर्फ भगवान विष्णु के जागने का ही नहीं, बल्कि हमारे अंदर की आत्मिक चेतना को जगाने का भी पर्व है। इस दिन व्रत-पूजन के साथ-साथ दान (खासकर कंबल या अनाज) का विशेष महत्व है। 2025 में इस पावन तिथि पर सच्चे मन से की गई भक्ति निश्चित ही जीवन में सुख-समृद्धि लाएगी।
🌿 हरि ओम तत्सत्। 🌿
