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Diwali 2025: मां लक्ष्मी गणपति आरती बिना अधूरी पूजा

दिवाली 2025 में मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की आरती के साथ पूजा को पूरा करें। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व। दिवाली पूजा को बनाएं अद्भुत और शुभ।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

दिवाली 2025: मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की आरती के बिना अधूरी होती है दिवाली पूजा

दिवाली का पर्व केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान और देवी-देवताओं के आशीर्वाद का भी समय है। इस पावन अवसर पर मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की आरती का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इनकी पूजा के बिना दिवाली की पूजा अधूरी रह जाती है। आइए जानते हैं कि कैसे इन दिव्य शक्तियों की आराधना से हमारा जीवन धन, समृद्धि और सुख से भर जाता है।

Contents
दिवाली 2025: मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की आरती के बिना अधूरी होती है दिवाली पूजादिवाली पूजा में मां लक्ष्मी और गणेश जी का महत्वक्यों जरूरी है लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा?दिवाली पूजा की तैयारी कैसे करें?पूजा सामग्रीपूजा स्थल की सजावटमां लक्ष्मी और गणपति की आरती का विधिवत तरीकाआरती से पहले की तैयारियांमां लक्ष्मी आरतीगणपति आरतीदिवाली पूजा के विशेष मंत्रलक्ष्मी मंत्रगणेश मंत्रदिवाली पूजा के बाद की महत्वपूर्ण बातेंनिष्कर्ष

दिवाली पूजा में मां लक्ष्मी और गणेश जी का महत्व

हिंदू धर्म में दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं, जबकि गणपति महाराज विघ्नहर्ता और मंगलकारी हैं। इन दोनों की संयुक्त पूजा से घर में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति का वास होता है।

क्यों जरूरी है लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा?

  • गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है – कोई भी शुभ कार्य उनकी पूजा के बिना पूर्ण नहीं होता
  • मां लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं, परंतु गणपति उस धन की रक्षा करते हैं
  • दोनों की संयुक्त उपासना से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है

दिवाली पूजा की तैयारी कैसे करें?

दिवाली 2025 में पूजा का विशेष महत्व होगा क्योंकि इस वर्ष अमावस्या तिथि का विशेष योग बन रहा है। पूजा की तैयारी के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

पूजा सामग्री

  • नए लाल या पीले वस्त्र (मां लक्ष्मी को प्रिय)
  • चांदी के सिक्के और कलश
  • गंगाजल, फूल, फल और मिठाई
  • दीपक के लिए शुद्ध घी
  • नवग्रह यंत्र (वैकल्पिक)

पूजा स्थल की सजावट

पूजा स्थल को रंगोली से सजाएं और मां लक्ष्मी के पदचिन्हों को घर के मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक बनाएं। सुनिश्चित करें कि पूजा का स्थान पूर्व या उत्तर दिशा में हो।

मां लक्ष्मी और गणपति की आरती का विधिवत तरीका

दिवाली की रात महानिशीथ काल में पूजा करने का विशेष महत्व है। आरती की सही विधि जान लें:

आरती से पहले की तैयारियां

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • दीपक जलाकर धूप-दीप दिखाएं

मां लक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

इस आरती के बाद मां लक्ष्मी को मिष्ठान्न का भोग लगाएं और घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।

गणपति आरती

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची
नुर्वी पुर्वी प्रेम कृपा जयाची॥

गणपति आरती के बाद मोदक का भोग लगाना न भूलें, क्योंकि यह गणेश जी का प्रिय प्रसाद है।

दिवाली पूजा के विशेष मंत्र

इन मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:

लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः
यह मंत्र किसी भी कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करता है।

दिवाली पूजा के बाद की महत्वपूर्ण बातें

पूजा समाप्त होने के बाद इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • पूजा स्थल को अचानक न छोड़ें – धीरे-धीरे पीछे हटते हुए निकलें
  • रात भर दीपक जलता रहने दें
  • अगले दिन प्रसाद को किसी गरीब या जरूरतमंद को दान करें

निष्कर्ष

दिवाली 2025 में मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की आराधना कर हम न केवल धन-संपत्ति बल्कि आत्मिक शांति भी प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई पूजा ही फलदायी होती है। इस दिवाली पर इन दिव्य शक्तियों का आशीर्वाद पाकर अपने जीवन को धन-धान्य से परिपूर्ण करें।

शुभ दीपावली!

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