# खुशियां चाहिए तो पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन करें यह काम
पितृ विसर्जनी अमावस्या का महत्व
पितृ विसर्जनी अमावस्या, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं, हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन पूर्वजों को तर्पण, श्राद्ध और दान देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण करता है, उसे धन, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
क्यों है यह दिन विशेष?
- इस दिन पितृ देवता धरती पर आते हैं और अपने वंशजों का आशीर्वाद देते हैं।
- तर्पण से पितरों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।
- दान-पुण्य करने से कुंडली के पितृ दोष शांत होते हैं।
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर क्या करें?
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल या तिल मिले जल से स्नान करें। स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करके पितरों का स्मरण करें।
2. पितरों का तर्पण करें
तर्पण करने के लिए काले तिल, जल, दूध और फूल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए अर्पित करें:
“ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितृदेवाय विद्महे, जगतधारिणे धीमहि, तन्नो पितृः प्रचोदयात्॥”
3. ब्राह्मण को भोजन कराएं
श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके लिए:
- सात्विक भोजन (दाल, चावल, सब्जी, घी) बनाएं।
- कुशा के आसन पर बैठाकर भोजन कराएं।
- भोजन के बाद दक्षिणा और वस्त्र दान करें।
4. पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं
पीपल को पितरों का वास माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाकर निम्न मंत्र बोलें:
“ॐ अक्षय्यं नमोऽस्तु ते, पितृणां तृप्तिमिच्छामि।”
5. गरीबों को अन्न दान करें
अन्नदान से पितरों को तृप्ति मिलती है। इस दिन:
- गेहूं, चावल, दाल आदि दान करें।
- गाय को हरा चारा खिलाएं।
- कौओं को भोजन अवश्य दें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- क्रोध न करें: इस दिन मन शांत रखें, किसी से झगड़ा न करें।
- मांस-मदिरा से दूर रहें: पितृ पक्ष में सात्विक आहार लें।
- तामसिक कार्य न करें: इस दिन अशुभ कामों से बचें।
पितृ विसर्जनी अमावस्या की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में कर्ण की मृत्यु के बाद उनकी आत्मा को स्वर्ग में सोने-चांदी के भोजन परोसे गए, लेकिन वे भूखे रह गए। जब यह बात इंद्रदेव ने बताई कि कर्ण ने जीवनभर सोना दान किया, लेकिन पितरों को अन्नदान नहीं दिया, तब कर्ण को पृथ्वी पर वापस भेजकर पितरों का तर्पण करवाया गया। तभी से पितृ पक्ष में अन्नदान का विशेष महत्व है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पितृ विसर्जनी अमावस्या पर तर्पण न करने से पितृ दोष लगता है?
हां, अगर पितरों का तर्पण नहीं किया जाता, तो पितृ दोष के कारण जीवन में संकट आ सकते हैं।
क्या महिलाएं भी तर्पण कर सकती हैं?
जी हां, वैदिक परंपरा में महिलाएं भी पितरों का तर्पण कर सकती हैं।
अगर पितृ पक्ष में श्राद्ध छूट जाए तो क्या करें?
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करके इसकी पूर्ति की जा सकती है।
निष्कर्ष
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन दान, पूजा और सद्कर्म करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, पितरों की कृपा से ही जीवन में खुशियां बनी रहती हैं।
“पितृऋण से मुक्ति पाएं, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाएं।”
