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Ekadashi May 2025 Varuthini Ekadashi Vrat 7 May Jane Kya Karen Kya Na Karen

7 मई 2025 को वरुथिनी एकादशी व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व जानें। इस दिन क्या करें और क्या न करें, जानकर पाएं पुण्य और आध्यात्मिक लाभ।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

वरुथिनी एकादशी मई 2025: पावन व्रत और उसका महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशियों में से वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। 7 मई 2025 को यह पावन व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत के नियम, पूजा विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।

Contents
वरुथिनी एकादशी मई 2025: पावन व्रत और उसका महत्ववरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्ववरुथिनी एकादशी व्रत विधिवरुथिनी एकादशी पर क्या करें और क्या न करेंवरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथावरुथिनी एकादशी व्रत का पारणनिष्कर्ष

वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से:

  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
  • आर्थिक समस्याओं का निवारण होता है
  • सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है
  • कठिन परिस्थितियों से रक्षा होती है

वरुथिनी एकादशी व्रत विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन को शांत रखें
  • एकादशी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठें

पूजा विधि

  • स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • तुलसी दल, फूल, फल और धूप-दीप से पूजा अर्चना करें
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें

वरुथिनी एकादशी पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • पूरे दिन उपवास रखें (यदि संभव न हो तो फलाहार करें)
  • मन से सभी प्रकार के वैर भाव को त्याग दें
  • गरीबों और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें
  • रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें

क्या न करें

  • किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) न खाएं
  • झूठ, छल या किसी का अपमान न करें
  • दिन में सोने से बचें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

वरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथा

पद्म पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक एक राजा रहते थे। एक बार उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। भगवान ने उन्हें वर मांगने को कहा तो राजा ने कहा – “हे प्रभु, मुझे ऐसा वर दीजिए जिससे मेरे राज्य के सभी प्राणियों का कल्याण हो।”

भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर कहा – “वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से तुम्हारी और तुम्हारी प्रजा की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।” तभी से यह व्रत मोक्षदायिनी माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण

व्रत का समापन द्वादशी तिथि (8 मई 2025) को सुबह सूर्योदय के बाद करना चाहिए। पारण के समय:

  • सर्वप्रथम भगवान विष्णु का ध्यान करें
  • ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराएं
  • उसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें
  • पारण में तिल, सोना, वस्त्र आदि का दान शुभ माना जाता है

निष्कर्ष

वरुथिनी एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत न केवल मोक्ष प्रदान करता है बल्कि सांसारिक सुखों की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आइए, हम सभी 7 मई 2025 को इस पावन एकादशी पर पूर्ण भक्तिभाव से व्रत रखकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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