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Falgun Amavasya 2025: फाल्गुन अमावस्या आज स्नान दान मुहूर्त महत्व

फाल्गुन अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त, स्नान-दान का महत्व और पूजा विधि जानें। इस पावन दिन के अनुष्ठानों से मिलेगा पुण्य लाभ और आध्यात्मिक शांति।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

फाल्गुन अमावस्या 2025: आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य लाभ का पर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। यह दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए समर्पित होता है। 2025 में यह पर्व 28 फरवरी को मनाया जाएगा। इस लेख में जानिए फाल्गुन अमावस्या का मुहूर्त, पूजा विधि और क्यों है यह दिन इतना खास…

Contents
फाल्गुन अमावस्या 2025: आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य लाभ का पर्वफाल्गुन अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्ततिथि और समयविशेष योगफाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्वपितृ तर्पण का दिनमहाशिवरात्रि से संबंधफाल्गुन अमावस्या पर क्या करें?सुबह का संकल्पपूजा विधिविशेष दानफाल्गुन अमावस्या की कथावैज्ञानिक दृष्टिकोणऋतु परिवर्तन का समयजल संरक्षण का संदेशनिष्कर्ष

फाल्गुन अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त

तिथि और समय

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2025, रात 09:14 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 28 फरवरी 2025, रात 11:26 बजे
  • स्नान-दान का श्रेष्ठ समय: 28 फरवरी सुबह 05:30 से 08:00 तक

विशेष योग

इस दिन सिद्धि योग रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य को सफल बनाने में सहायक माना जाता है। सूर्य और चंद्रमा दोनों ही कुंभ राशि में स्थित होंगे।

फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व

पितृ तर्पण का दिन

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पितरों को जल अर्पित करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। गरुड़ पुराण में कहा गया है:

“अमावस्यां तु यो दद्यात् तिलमिश्रं जलं पितृम्।
स याति परमां सिद्धिं नरः पापविमुक्तः॥”

महाशिवरात्रि से संबंध

फाल्गुन अमावस्या के ठीक बाद महाशिवरात्रि का पर्व आता है। इसलिए यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए भी शुभ माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या पर क्या करें?

सुबह का संकल्प

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ वस्त्र धारण करके संकल्प लें: “मम पितृपितामहादि तृप्तये फाल्गुन अमावस्या व्रतमहं करिष्ये”

पूजा विधि

  • पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं
  • कुशा के आसन पर बैठकर पितरों को तिल-जल अर्पित करें
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ पितृदेवाय नमः स्वधा”
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान दें

विशेष दान

इस दिन इन वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है:

  • तिल: पापों से मुक्ति के लिए
  • काला उड़द: शनि दोष शांति हेतु
  • गुड़: पितृ दोष निवारण के लिए
  • कंबल: ठंड से राहत पाने हेतु

फाल्गुन अमावस्या की कथा

पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा: “हे पितामह, अमावस्या तिथि में क्यों है इतना महत्व?”

तब भीष्म ने बताया कि सतयुग में जब राजा मान्धाता ने फाल्गुन अमावस्या पर घोर तपस्या की थी, तब भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान दिया कि इस दिन जो भी सच्चे मन से पितरों का तर्पण करेगा, उसके कुल को सदैव आशीर्वाद मिलेगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

ऋतु परिवर्तन का समय

फाल्गुन माह में प्रकृति शीत ऋतु से बसंत की ओर अग्रसर होती है। इस समय स्नान और दान से शरीर व मन को नई ऊर्जा मिलती है।

जल संरक्षण का संदेश

तर्पण की परंपरा हमें जल के महत्व का स्मरण कराती है। पितरों को जल अर्पित करने की प्रथा वास्तव में प्रकृति संरक्षण का ही एक रूप है।

निष्कर्ष

फाल्गुन अमावस्या हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है। यह दिन शुद्धि, दान और साधना के लिए समर्पित है। 2025 में 28 फरवरी को इस पावन तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पितरों को याद करें और जरूरतमंदों को दान दें। ऐसा करने से आपको जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होगी।

“अमावास्या तिथौ यस्तु पितृन् संतर्पयेन्नरः।
स लभेत् परमां सिद्धिं प्रेत्य चानन्त्यमश्नुते॥”

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