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Ganesh Chaturthi 2025 19 सितंबर गणेश जन्म की पौराणिक कथा

19 सितंबर 2025 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर जानिए भगवान गणेश की पौराणिक कथा, महत्व और उत्सव मनाने के खास तरीके। पढ़ें सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

गणेश चतुर्थी 2025: 19 सितंबर को मनाई जाएगी भगवान गणेश की जयंती

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। साल 2025 में यह पर्व 19 सितंबर, शुक्रवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। आइए जानते हैं गणपति बप्पा के जन्म की पौराणिक कथा, पूजा विधि और इस पर्व का महत्व।

Contents
गणेश चतुर्थी 2025: 19 सितंबर को मनाई जाएगी भगवान गणेश की जयंतीभगवान गणेश के जन्म की पौराणिक कथामाता पार्वती ने बनाया गणेश कोगजानन का प्राकट्यगणेश चतुर्थी पूजा विधिमहत्वपूर्ण मंत्रगणेश चतुर्थी का महत्वगणेश विसर्जन की परंपराविसर्जन का महत्वनिष्कर्ष

भगवान गणेश के जन्म की पौराणिक कथा

पुराणों में भगवान गणेश के जन्म से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध कथा शिवपुराण में वर्णित है:

माता पार्वती ने बनाया गणेश को

एक बार जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं, तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने इस बालक को द्वारपाल बनाकर आदेश दिया कि “किसी को भी अंदर न आने देना”। कुछ समय बाद भगवान शिव वहां आए, लेकिन बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर शिवजी ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया।

गजानन का प्राकट्य

जब माता पार्वती को इस घटना का पता चला तो वे क्रोधित हो गईं। उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर उस बालक के धड़ पर लगा दिया और उसे नया जीवन दान दिया। इस प्रकार गजानन (हाथी के मुख वाले देवता) का प्राकट्य हुआ। शिवजी ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया और कहा:

“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

गणेश चतुर्थी के दिन इस विधि से पूजन करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके कलश स्थापना करें
  • गणेशजी की मूर्ति को लाल कपड़े पर स्थापित करें
  • ऋषि पूजन, कलश पूजन और गणपति आवाहन करें
  • गणेशजी को दुर्वा, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें
  • गणपति अथर्वशीर्ष या सरल गणेश मंत्रों का जाप करें
  • आरती के बाद प्रसाद वितरण करें

महत्वपूर्ण मंत्र

  • ॐ गं गणपतये नमः (मूल मंत्र)
  • वक्रतुण्डाय हुम (संकटनाशक मंत्र)
  • ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् (गायत्री मंत्र)

गणेश चतुर्थी का महत्व

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है:

  • भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति कहा जाता है
  • यह त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है जिसे गणेशोत्सव कहते हैं
  • महाराष्ट्र में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है
  • इस दिन गणेशजी की पूजा करने से सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं
  • गणेश चतुर्थी व्रत रखने से संतान प्राप्ति और धन-समृद्धि का वरदान मिलता है

गणेश विसर्जन की परंपरा

गणेश चतुर्थी के बाद 1, 3, 5, 7 या 11 दिनों के बाद गणेश विसर्जन किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु गणपति बप्पा की मूर्ति को जलाशय में विसर्जित करते हुए यह मंत्र बोलते हैं:

“गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या”
(हे गणपति बप्पा, अगले साल जल्दी आना)

विसर्जन का महत्व

  • यह प्रकृति चक्र का प्रतीक है – जन्म, जीवन और मृत्यु
  • मूर्ति विसर्जन के माध्यम से भगवान को उनके निवास स्थान भेजा जाता है
  • मिट्टी की मूर्ति जल में घुलकर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व हमें भगवान गणेश के गुणों – बुद्धि, विवेक और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा देता है। 19 सितंबर 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर हम सभी को गणपति बप्पा से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारे जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें। गणपति बप्पा मोरया!

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