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गंगा सप्तमी 2025: 26 या 27 अप्रैल? तिथि, महत्व और पूजा विधि
हिंदू धर्म में माँ गंगा को पवित्रता, मोक्ष और जीवनदायिनी का प्रतीक माना जाता है। गंगा सप्तमी का पर्व गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के दिन के रूप में मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 26 अप्रैल को मनाया जाएगा, लेकिन कुछ पंचांगों के अनुसार 27 अप्रैल को भी मनाने की परंपरा है। आइए, जानते हैं इस पावन पर्व का सही समय, महत्व और पूजन विधि।
गंगा सप्तमी 2025 की सही तिथि
26 अप्रैल 2025, शनिवार को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी। हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में 27 अप्रैल को भी इसे मनाया जा सकता है। तिथि निर्धारण के लिए स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से सलाह लेना उचित होगा।
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 25 अप्रैल को रात 10:58 बजे से
- सप्तमी तिथि समाप्त: 26 अप्रैल को रात 08:35 बजे तक
गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और फिर धरती पर छोड़ा। इसलिए इसे “गंगावतरण दिवस” भी कहते हैं।
- गंगा स्नान से सभी पापों का नाश होता है
- पितृदोष से मुक्ति मिलती है
- संतान प्राप्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है
गंगा सप्तमी पूजा विधि
सुबह की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर गंगा जल से घर की शुद्धि करें
- पूजा स्थल पर गंगा माँ की प्रतिमा या कलश स्थापित करें
मुख्य पूजन विधि
- गंगा माँ को सफेद फूल, दूध, मिश्री और गंगाजल अर्पित करें
- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें: “ॐ नमः शिवायै गंगायै नारायण्यै नमो नमः”
- गंगा आरती करें और प्रसाद वितरित करें
गंगा सप्तमी पर विशेष उपाय
इस दिन ये छोटे-छोटे उपाय करने से विशेष फल प्राप्त होता है:
- गरीबों को सफेद वस्त्र और मिष्ठान्न दान करें
- गंगा तट पर जाकर दीपदान करें
- गायत्री मंत्र का जाप करें
गंगा सप्तमी की कथा
पुराणों में वर्णित है कि सगर के 60,000 पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए भगीरथ ने कठोर तप किया। गंगा ने पृथ्वी पर आने से पहले शर्त रखी कि कोई उनके वेग को संभाल सके। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में बाँधकर धरती पर धीरे-धीरे उतारा। इसी घटना की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।
निष्कर्ष
गंगा सप्तमी हमें प्रकृति और धर्म के बीच के पवित्र संबंध की याद दिलाती है। 2025 में 26 अप्रैल को इस पर्व को मनाकर हम माँ गंगा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं। यदि संभव हो तो गंगा तट पर जाकर पूजन करें, अन्यथा घर पर ही गंगाजल से पूजा संपन्न करें। माँ गंगा की कृपा से जीवन में पवित्रता और समृद्धि का आगमन होता है।
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