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Gangaur Vrat 2025 गणगौर व्रत विधि व्रत कथा

गणगौर व्रत 2025 की पूरी जानकारी: व्रत विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त। जानें कैसे करें गणगौर पूजा और पाएं माता पार्वती का आशीर्वाद। सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं यह पावन विधि।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

गणगौर व्रत 2025: पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

हिंदू धर्म में गणगौर व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाए जाने वाले इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) की पूजा की जाती है। 2025 में यह व्रत 2 अप्रैल को पड़ रहा है। आइए जानें इस व्रत की संपूर्ण विधि, महत्व और मनोहारी कथा।

Contents
गणगौर व्रत 2025: पूजा विधि, महत्व और व्रत कथागणगौर व्रत का महत्वगणगौर व्रत 2025 की तिथि और मुहूर्तगणगौर व्रत की संपूर्ण विधिव्रत से पहले की तैयारीव्रत के दिन की पूजा विधिगणगौर व्रत कथाविशेष नियम एवं सावधानियांगणगौर विसर्जन की विधिनिष्कर्ष

गणगौर व्रत का महत्व

यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से:

  • विवाहित महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है
  • अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है
  • पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है

गणगौर व्रत 2025 की तिथि और मुहूर्त

  • व्रत तिथि: 2 अप्रैल 2025 (बुधवार)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल को सुबह 10:15 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 2 अप्रैल को दोपहर 12:35 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 6:30 से 11:00 बजे तक

गणगौर व्रत की संपूर्ण विधि

व्रत से पहले की तैयारी

  • व्रत के एक दिन पहले सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • घर की सफाई कर पूजा स्थल को स्वच्छ बनाएं
  • मिट्टी या धातु की गणगौर प्रतिमा बाजार से लाएं
  • पूजन सामग्री (फूल, अक्षत, धूप, दीप) तैयार करें

व्रत के दिन की पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
  2. पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें
  3. गणगौर की प्रतिमा को स्थापित कर ओम नमः शिवाय मंत्र से आवाहन करें
  4. माता पार्वती को सिंदूर, मेहंदी और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें
  5. इस मंत्र का उच्चारण करें: “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”
  6. कथा सुनने के बाद आरती उतारें
  7. सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री दान करें

गणगौर व्रत कथा

प्राचीन काल में पार्वती जी ने अपने पिता के घर पर 16 दिनों तक व्रत रखकर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। कथा के अनुसार:

माता पार्वती ने हिमालय पर कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। जब पार्वती जी मायके गईं तो उन्होंने अपने माता-पिता को इस व्रत का महत्व समझाया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि विवाहित कन्याएं मायके जाकर इस व्रत को करती हैं और फिर ससुराल में विधिवत पूजन करती हैं।

विशेष नियम एवं सावधानियां

  • व्रत के दिन नमक और अनाज का सेवन वर्जित है
  • फलाहार या दूध से बने व्यंजन ही ग्रहण करें
  • पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें

गणगौर विसर्जन की विधि

व्रत के अगले दिन या चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी को गणगौर विसर्जन किया जाता है:

  • प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर पुनः पूजन करें
  • गणगौर को फूल, मिठाई और वस्त्र अर्पित करें
  • नदी या तालाब में प्रतिमा का विसर्जन करें
  • साथ ही इस मंत्र का जाप करें: “ओम उमा महेश्वराय नमः”

निष्कर्ष

गणगौर व्रत हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो स्त्री-सशक्तिकरण और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। 2025 में इस पावन व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त होगी।

ध्यान रखें कि व्रत के सभी नियमों का पालन करते हुए ही पूजन करें। साथ ही, व्रत कथा को पूरे मन से सुनें और उसके संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।

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