21 मार्च को गोविन्द द्वादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान कृष्ण के अवतार खाटूश्यामजी की कथा से जुड़ा हुआ है। इस दिन व्रत रखकर भक्त श्याम बाबा की कृपा पाते हैं और उनकी पौराणिक लीलाओं को याद करते हैं।
खाटूश्यामजी कौन हैं?
खाटूश्यामजी को बर्बरीक के नाम से भी जाना जाता है, जो महाभारत काल में घटित हुए एक अद्भुत चमत्कार के प्रतीक हैं। वे भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। इनकी कथा भक्ति, त्याग और शक्ति का अनूठा संगम है।
महाभारत से जुड़ी पौराणिक कथा
- जन्म और शक्तियाँ: बर्बरीक का जन्म माता मौरवी (हिडिम्बा) के गर्भ से हुआ था। उन्हें भगवान शिव का वरदान प्राप्त था कि वे किसी भी युद्ध में कमजोर पक्ष का साथ देंगे।
- तीन बाणों की शक्ति: बर्बरीक ने घोर तपस्या करके भगवान शिव से तीन अजेय बाण प्राप्त किए थे, जिनसे वे पल भर में पूरी सेना का संहार कर सकते थे।
- कृष्ण की परीक्षा: जब महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ, तो भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक की परीक्षा ली। उन्होंने बर्बरीक से पूछा कि वह किसका साथ देंगे। बर्बरीक ने उत्तर दिया कि वह हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे।
- शीश दान की महानता: भगवान कृष्ण ने समझाया कि यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुए, तो वह अकेले ही पांडवों और कौरवों का विनाश कर देंगे। इसलिए, उन्होंने बर्बरीक से उनका शीश दान में माँगा। बर्बरीक ने बिना हिचकिचाहट अपना शीश दान कर दिया।
खाटूश्यामजी बनने की कथा
बर्बरीक के इस महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। उन्होंने कहा –
“हे वीर! तुम्हारा शीश खाटू धाम में स्थापित किया जाएगा और कलियुग में तुम श्याम नाम से जाने जाओगे। जो भक्त तुम्हारे नाम का स्मरण करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे।”
खाटूधाम की स्थापना
- बर्बरीक का शीश राजस्थान के खाटू गाँव में स्थापित किया गया, जहाँ आज खाटूश्यामजी का प्रसिद्ध मंदिर है।
- इस मंदिर में श्याम बाबा की मूर्ति काले पत्थर की बनी हुई है, जो अत्यंत चमत्कारिक मानी जाती है।
गोविन्द द्वादशी और खाटूश्यामजी
गोविन्द द्वादशी के दिन खाटूश्यामजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत रखकर भक्त उनकी कृपा पाने की कामना करते हैं।
व्रत विधि
- प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- मंदिर जाकर श्याम बाबा के दर्शन करें या घर पर ही उनकी मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
- इस मंत्र का जाप करें –
“ॐ श्री श्याम देवाय नमः”
- फल, मेवा और पंचामृत का भोग लगाएं।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करके व्रत का पारण करें।
खाटूश्यामजी के चमत्कार
खाटूश्यामजी को कलियुग के देवता माना जाता है। उनके भक्तों पर वे सदैव कृपा बनाए रखते हैं। कई भक्तों ने उनके चमत्कारों का अनुभव किया है –
- असाध्य रोगों से मुक्ति
- आर्थिक संकटों का निवारण
- संतान प्राप्ति
- शत्रुओं पर विजय
श्याम की भक्ति ही सच्चा सुख
खाटूश्यामजी की कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और त्याग ही ईश्वर को प्रसन्न करने का मार्ग है। गोविन्द द्वादशी के पावन अवसर पर हम सभी को उनकी शरण में जाना चाहिए और उनकी कृपा पाने का प्रयास करना चाहिए।
“हारे का सहारे, खाटूश्याम हमारे।”
