Gupt Navratri 2025: आज से गुप्त नवरात्रि आरंभ, जानिए शुभ योग, घटस्थापना मुहूर्त और तिथियां
गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक साधकों और शक्ति उपासकों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह वह समय होता है जब माँ दुर्गा के गुप्त रूपों की आराधना करने से साधक को रहस्यमयी शक्तियों की प्राप्ति होती है। 2025 की गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना से लेकर विसर्जन तक का समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
गुप्त नवरात्रि 2025: प्रारंभ तिथि और महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुप्त नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 जनवरी, बुधवार से हो रही है। यह नवरात्रि आषाढ़ और माघ मास में मनाई जाती है, जिसे “गुप्त” यानी गोपनीय इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें तांत्रिक विधियों और गहन साधना पर विशेष बल दिया जाता है।
- प्रथम दिवस (22 जनवरी): घटस्थापना, माँ शैलपुत्री पूजन
- अंतिम दिवस (30 जनवरी): दुर्गा अष्टमी, हवन एवं कन्या पूजन
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। 2025 में इसका शुभ समय निम्नलिखित है:
- तिथि: 22 जनवरी 2025
- शुभ योग: सिद्धि योग (सुबह 5:30 से 12:18 तक)
- घटस्थापना मुहूर्त: प्रातः 6:42 से 8:19 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 बजे तक
ध्यान रखें: घटस्थापना के समय “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करें।
गुप्त नवरात्रि के नौ देवियों के स्वरूप
इस नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ गुप्त स्वरूपों की पूजा की जाती है:
- दिन 1: माँ तारा (उग्र तारिणी रूप)
- दिन 2: माँ भुवनेश्वरी (ब्रह्मांड की स्वामिनी)
- दिन 3: माँ छिन्नमस्ता (मुक्तिदायिनी)
- दिन 4: माँ त्रिपुर भैरवी (तांत्रिकों की अधिष्ठात्री)
- दिन 5: माँ धूमावती (विधवा रूप)
- दिन 6: माँ बगलामुखी (शत्रुनाशिनी)
- दिन 7: माँ कमला (लक्ष्मी स्वरूप)
- दिन 8: माँ मातंगी (विद्या की देवी)
- दिन 9: माँ कालरात्रि (भयनाशिनी)
विशेष पूजा विधि एवं मंत्र
गुप्त नवरात्रि में निम्न विधि से पूजन करें:
- प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र धारण करें
- मिट्टी के कलश पर स्वस्तिक बनाकर जल भरें
- कलश के ऊपर नारियल रखकर लाल कपड़े से ढकें
- प्रतिदिन देवी के मंत्रों का जाप करें:
- मूल मंत्र: “ॐ ह्रीं दुर्गायै नम:”
- तांत्रिक मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
- अंत में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
गुप्त नवरात्रि व्रत के लाभ
इस व्रत को करने से साधक को अद्भुत फल प्राप्त होते हैं:
- गुप्त कामनाओं की पूर्ति
- तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति
- शत्रु बाधाओं से मुक्ति
- आध्यात्मिक उन्नति
- मनोवैज्ञानिक शक्ति में वृद्धि
निष्कर्ष
गुप्त नवरात्रि का यह पावन समय आत्मशुद्धि और दिव्य शक्तियों की प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम है। 22 से 30 जनवरी 2025 तक चलने वाले इस पर्व में देवी के गुप्त स्वरूपों की साधना करके साधक जीवन के हर संकट से मुक्ति पा सकता है। श्रद्धा और विधि-विधान से पूजन करने पर माँ दुर्गा अवश्य ही अपने भक्तों पर कृपा बरसाएंगी।
ध्यान दें: सभी मुहूर्त उज्जैन पंचांग के अनुसार दिए गए हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
