गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र वाणी
गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है, जिसमें संतों, गुरुओं और भक्तों की वाणी समाहित है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है। इसमें कबीर जी जैसे महान संतों के 224 शबद भी शामिल हैं, जो मानवता को प्रेम, भक्ति और सच्चाई का संदेश देते हैं।
गुरु ग्रंथ साहिब: संतों की अमर वाणी
गुरु ग्रंथ साहिब का महत्व
- यह सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा संकलित किया गया।
- इसमें छह सिख गुरुओं और 30 अन्य संतों की वाणी सम्मिलित है।
- यह एकमात्र ऐसा धार्मिक ग्रंथ है, जिसे गुरु का दर्जा प्राप्त है।
संत कबीर के शबद: जीवन का सार
कबीर जी के 224 शबद गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। इनकी वाणी सरल, किंतु गहन अर्थों से भरी है। उनके दोहे और शबद आज भी मनुष्य को सच्चाई और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाते हैं।
कबीर जी के प्रमुख शबद और उनका अर्थ
1. “माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर”
इस शबद में कबीर जी कहते हैं कि माला फेरने से कुछ नहीं होता, जब तक मन का भ्रम नहीं मिटता। भक्ति बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि मन की शुद्धता से होती है।
2. “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय”
यह शबद हमें सिखाता है कि दूसरों में दोष ढूंढने से पहले अपने अंदर झांको। जो व्यक्ति स्वयं को सुधार ले, उसे संसार में कोई बुराई नजर नहीं आती।
3. “दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय”
कबीर जी कहते हैं कि लोग दुख में तो ईश्वर को याद करते हैं, लेकिन सुख में भूल जाते हैं। सच्ची भक्ति तो सुख-दुख दोनों में समान रहने वाली है।
गुरु ग्रंथ साहिब में अन्य संतों की वाणी
संत नामदेव जी के शबद
नामदेव जी के पद गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं, जो नाम सिमरन का महत्व बताते हैं। उनका कहना है कि ईश्वर का नाम ही सच्चा सहारा है।
संत रविदास जी की शिक्षाएं
रविदास जी के शबद समानता और प्रेम का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा, “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, यानी मन पवित्र हो तो ईश्वर कहीं भी मिल सकता है।
गुरुवाणी का आधुनिक जीवन में महत्व
आध्यात्मिक शांति का स्रोत
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गुरुवाणी मन को शांति देती है। इसके शबद हमें धैर्य, संतोष और प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।
सामाजिक एकता का संदेश
गुरु ग्रंथ साहिब में सभी जाति और धर्म के संतों की वाणी है, जो समानता का संदेश देती है। यह ग्रंथ मानवता को एक सूत्र में बांधता है।
गुरुवाणी ही जीवन का सार
गुरु ग्रंथ साहिब केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। कबीर जी सहित सभी संतों की वाणी हमें सच्चाई, प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाती है। इन शबदों को अपनाकर हम न केवल अपना, बल्कि समाज का कल्याण कर सकते हैं।
गुरुवाणी का सार:
- सत्य की राह पर चलो
- मन से अहंकार मिटाओ
- ईश्वर की भक्ति में लीन रहो
आइए, गुरु ग्रंथ साहिब की इस पवित्र वाणी को अपने जीवन में उतारें और आत्मिक शांति प्राप्त करें।

