# हलषष्ठी 2025: हलषष्ठी पर पुत्र की दीर्घायु के लिए इस विधि से करें पूजा, कामना होगी पूरी
हलषष्ठी का महत्व और पौराणिक कथा
हलषष्ठी, जिसे ललही छठ या हरछठ भी कहा जाता है, एक प्रमुख हिंदू व्रत है जो मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपने पुत्रों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म इसी दिन हुआ था। बलराम का प्रमुख शस्त्र हल (फाल) था, इसलिए इस पर्व को हलषष्ठी कहा जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार, माता यशोदा ने इसी दिन भगवान कृष्ण के लिए व्रत रखा था, जिससे उनकी रक्षा हुई।
हलषष्ठी 2025: तिथि और मुहूर्त
हलषष्ठी 2025 में 17 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी।
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2025 को रात 09:14 बजे
- षष्ठी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2025 को रात 10:31 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से 10:00 बजे तक
हलषष्ठी पूजा की विधि
सामग्री
- हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल
- गाय का दूध, दही, घी
- गुड़, चना, सत्तू
- हल (फाल) की प्रतिमा या चित्र
- दीपक, अगरबत्ती
पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- हल (फाल) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उस पर हल्दी, कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाएं।
- दीपक जलाकर इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ नमो भगवते हलधराय नमः”
- गाय के दूध, दही और घी से हल की पूजा करें।
- अंत में चना, गुड़ और सत्तू का भोग लगाएं।
- कथा सुनकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
हलषष्ठी व्रत कथा
एक गाँव में एक विधवा महिला रहती थी जिसका एक ही पुत्र था। एक बार हलषष्ठी के दिन उसने व्रत रखा, लेकिन अज्ञानतावश उसने अनाज ग्रहण कर लिया। इससे देवी नाराज हो गईं और उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। पश्चाताप करने पर देवी ने प्रसन्न होकर उसके पुत्र को जीवित कर दिया और आशीर्वाद दिया कि जो भी माता इस व्रत को विधि-विधान से करेगी, उसके पुत्र को दीर्घायु प्राप्त होगी।
हलषष्ठी के नियम और सावधानियां
- इस दिन अनाज का सेवन न करें। केवल फल, दूध और सत्तू ग्रहण करें।
- पूजा के समय मन शुद्ध और भक्तिभाव से पूर्ण होना चाहिए।
- व्रत करने वाली महिलाएं पूरे दिन उपवास रख सकती हैं या एक समय फलाहार कर सकती हैं।
- शाम को चंद्रोदय के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
हलषष्ठी का प्रसाद
इस दिन चना, गुड़ और सत्तू का विशेष महत्व है। प्रसाद के रूप में इन्हीं वस्तुओं का वितरण किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में मालपुआ, खीर और फल भी चढ़ाए जाते हैं।
निष्कर्ष
हलषष्ठी का व्रत माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से पुत्र की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। 17 अगस्त 2025 को इस व्रत को पूरी श्रद्धा से मनाएं और भगवान बलराम व माता यशोदा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
“यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः। तत्र श्रीर्विजयो भूतिः ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥”
इस पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!
