हनुमान जयंती, भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। यह दिन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, क्योंकि हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में हनुमान जयंती अलग तिथि पर मनाई जाती है? इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्यों तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हनुमान जयंती 2025 में आज मनाई जा रही है और इसके पीछे का धार्मिक एवं ज्योतिषीय कारण क्या है।
हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?
उत्तर भारत में हनुमान जयंती प्रायः चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो अप्रैल के महीने में पड़ती है। वहीं, दक्षिण भारत में इसे मार्गशीर्ष मास की अमावस्या (दक्षिणायन हनुमान जयंती) के दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में होती है।
2025 में दक्षिण भारत में हनुमान जयंती की तिथि
इस वर्ष, दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती 25 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह तिथि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में विशेष रूप से मान्य है।
क्यों अलग है दक्षिण भारत में हनुमान जयंती की तिथि?
दक्षिण भारत में हनुमान जयंती के अलग दिन मनाए जाने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कारण हैं:
- पंचांग भेद: उत्तर और दक्षिण भारत में अलग-अलग पंचांग प्रणालियाँ प्रचलित हैं। दक्षिण में तमिल, मलयालम और कन्नड़ पंचांग के अनुसार तिथियाँ निर्धारित की जाती हैं।
- ज्योतिषीय गणना: दक्षिण भारत में हनुमान जी का जन्म मार्गशीर्ष अमावस्या को माना जाता है, जबकि उत्तर में चैत्र पूर्णिमा को।
- पौराणिक मान्यता: कुछ मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण में हनुमान जी ने रामायण काल के दौरान विशेष लीलाएँ की थीं, इसलिए यहाँ अलग तिथि मनाई जाती है।
दक्षिण भारत में हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है?
दक्षिण भारत में हनुमान जयंती का उत्सव बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव से मनाया जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख रीति-रिवाज हैं:
1. विशेष पूजा एवं आरती
मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ किया जाता है।
2. हनुमान विग्रह को सजाना
हनुमान जी की मूर्तियों को लाल चंदन, फूल और केसर से सजाया जाता है। कई जगहों पर उन्हें सोने-चाँदी के आभूषणों से विभूषित किया जाता है।
3. भंडारे एवं प्रसाद वितरण
मंदिरों में पंचामृत, लड्डू और बेसन के व्यंजन भक्तों में बाँटे जाते हैं।
4. शोभा यात्राएँ
कई शहरों में हनुमान जी की मूर्ति की शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें भक्त “जय हनुमान” और “राम भक्त हनुमान की जय” के जयकारे लगाते हैं।
हनुमान जयंती पर विशेष मंत्र एवं स्तुति
इस पावन अवसर पर निम्न मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- हनुमान बीज मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः”
- हनुमान गायत्री मंत्र: “ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्”
- संकट मोचन मंत्र: “ॐ हनुमान नमो नमः, श्री राम दूताय नमः”
हनुमान जी की कृपा पाने का दिन
हनुमान जयंती का पर्व न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें हनुमान जी के गुणों – साहस, निष्ठा और सेवाभाव – को अपनाने की प्रेरणा देता है। चाहे उत्तर हो या दक्षिण, हनुमान जी की भक्ति सभी को एक सूत्र में बाँधती है।
आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏🚩
