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हनुमान जयंती विशेष कहां मिले थे हनुमान जी अपने बेटे से

Published June 26, 2026
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Contents
हनुमान जयंती विशेषः कहां मिले थे हनुमान जी अपने बेटे सेहनुमान जी और मकरध्वज की मुलाकात की पौराणिक कथाहनुमान जी और मकरध्वज का युद्धमिलन का मार्मिक प्रसंगहनुमान जयंती का महत्वनिष्कर्ष

हनुमान जयंती विशेषः कहां मिले थे हनुमान जी अपने बेटे से

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर भक्तों के हृदय में बजरंगबली की महिमा और उनके जीवन की अद्भुत घटनाओं के प्रति जिज्ञासा बढ़ जाती है। क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी का अपने पुत्र मकरध्वज से मिलन कैसे हुआ? यह कथा न केवल रोचक है, बल्कि भक्ति, कर्तव्य और पिता-पुत्र के अटूट बंधन का भी प्रतीक है। आइए, इस पवित्र प्रसंग को विस्तार से जानें।

हनुमान जी और मकरध्वज की मुलाकात की पौराणिक कथा

रामायण के उत्तरकांड में वर्णित इस प्रसंग के अनुसार, जब भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की, तब हनुमान जी ने अशोक वाटिका में सीता माता की खोज की थी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी दौरान हनुमान जी का सामना अपने ही पुत्र मकरध्वज से हुआ था।

  • मकरध्वज का जन्म हनुमान जी के पसीने की बूंद से हुआ था, जब वह सूर्य को फल समझकर निगलने के लिए आकाश में उड़े थे।
  • यह पसीना एक मछली ने ग्रहण किया, जिससे मकरध्वज का जन्म हुआ।
  • मकरध्वज को पाताल लोक का रक्षक नियुक्त किया गया था।

हनुमान जी और मकरध्वज का युद्ध

जब अहिरावण ने भगवान राम और लक्ष्मण को अपहरण कर पाताल लोक ले जाया, तब हनुमान जी उन्हें बचाने पहुँचे। पाताल के द्वार पर उन्हें एक अद्भुत वानर मिला, जो उनके ही समान तेजस्वी था।

  • मकरध्वज ने हनुमान जी को पाताल में प्रवेश से रोका।
  • पिता-पुत्र के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
  • अंततः हनुमान जी ने मकरध्वज को पराजित किया।

मिलन का मार्मिक प्रसंग

जब मकरध्वज को पता चला कि उनके सामने स्वयं उनके पिता हनुमान जी हैं, तो वे भावुक हो गए। हनुमान जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और पाताल लोक का दायित्व सौंपा।

इस प्रसंग की शिक्षा:

  • कर्तव्य सर्वोपरि होता है, चाहे वह पारिवारिक संबंधों के आगे भी हो।
  • हनुमान जी का मकरध्वज से मिलन भाग्य की विचित्रता को दर्शाता है।
  • यह कथा पिता-पुत्र के पवित्र बंधन का प्रतीक है।

हनुमान जयंती का महत्व

चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली हनुमान जयंती हमें बजरंगबली के जीवन की इन अद्भुत घटनाओं से परिचित कराती है। इस दिन:

  • हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया जाता है।
  • भक्त लाल रंग के फूल और चोला चढ़ाते हैं।
  • हनुमान जी की कथाओं को सुनने का विशेष महत्व है।

निष्कर्ष

हनुमान जी और मकरध्वज की मुलाकात की यह कथा हमें जीवन के गहरे सत्यों से परिचित कराती है। हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर आइए, हम बजरंगबली के चरणों में अपना शीश नवाएँ और उनके जीवन से प्रेरणा लें। जय श्री राम, जय हनुमान!

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