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Hariyali Teej 2025 Vrat Katha हरियाली तीज व्रत कथा पूजा में पढ़ें

हरियाली तीज 2025 व्रत कथा पढ़ें और जानें पूजा विधि, महत्व व मंगलमय कथा। इस व्रत को सफल बनाने के लिए यह कथा जरूर पढ़ें।

Published July 2, 2026
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6 Min Read

हरियाली तीज 2025 व्रत कथा: आस्था और उल्लास का पर्व

हरियाली तीज का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो सुहागन स्त्रियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। हरियाली तीज 2025 में भी लाखों महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए यह व्रत रखेंगी। इस लेख में हम आपके लिए हरियाली तीज व्रत कथा और पूजा विधि विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं।

Contents
हरियाली तीज 2025 व्रत कथा: आस्था और उल्लास का पर्वहरियाली तीज का महत्वहरियाली तीज 2025 व्रत कथाकथा का प्रारंभकथा का मोड़हरियाली तीज 2025 पूजा विधिविशेष सामग्रीहरियाली तीज व्रत के नियमव्रत पारण का समयहरियाली तीज 2025 का शुभ मुहूर्तज्योतिषीय महत्वहरियाली तीज की परंपराएँराजस्थान में उत्सवउत्तर प्रदेश और बिहार में विधिहरियाली तीज व्रत का फलपौराणिक उद्धरणनिष्कर्ष

हरियाली तीज का महत्व

हरियाली तीज सुहाग की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा पर्व है। इस दिन व्रत रखकर व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:

  • यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए अखंड सुहाग का वरदान लेकर आता है
  • कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है
  • व्रत से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है
  • यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम को मजबूत करता है

हरियाली तीज 2025 व्रत कथा

प्राचीन काल की बात है, एक नगर में सावित्री नाम की एक साध्वी स्त्री रहती थी। वह नित्य शिव-पार्वती की पूजा किया करती थी। एक बार हरियाली तीज के दिन उसने विधि-विधान से व्रत रखा और पूरे मन से व्रत कथा सुनी।

कथा का प्रारंभ

सावित्री की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने कहा: “हे माता, मेरी कोई संतान नहीं है। कृपया मुझे पुत्र रत्न का वरदान दें।”

माता पार्वती ने कहा: “तथास्तु! तुम्हें एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त होगा। परंतु याद रखना, जब वह 16 वर्ष का होगा तो उसके प्राण हरने आएंगे।”

कथा का मोड़

समय बीतता गया और सावित्री को एक पुत्र हुआ जिसका नाम सत्यवान रखा गया। जब सत्यवान 16 वर्ष का हुआ तो एक दिन यमराज उसके प्राण लेने आए। सावित्री ने यमराज से प्रार्थना की: “हे धर्मराज! मैंने हरियाली तीज का व्रत रखा है, कृपया मेरे पुत्र को जीवनदान दें।”

यमराज ने कहा: “हे साध्वी! तुम्हारी भक्ति और व्रत की शक्ति से प्रभावित होकर मैं तुम्हारे पुत्र को जीवनदान देता हूँ।” इस प्रकार सावित्री के व्रत और भक्ति के बल पर उसके पुत्र को नया जीवन मिला।

हरियाली तीज 2025 पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन इस विधि से पूजा करने पर मनोकामना पूर्ण होती है:

  • प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  • हरे रंग के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री और मेहंदी चढ़ाएं
  • निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमः शिवाय पार्वतीपतये नमः”
  • व्रत कथा का पाठ करें और आरती उतारें
  • सुहागिन स्त्रियों को सुहाग की सामग्री दान करें

विशेष सामग्री

हरियाली तीज की पूजा में इन वस्तुओं का विशेष महत्व है:

  • हरी चूड़ियाँ – सौभाग्य का प्रतीक
  • मेहंदी – सुहाग की निशानी
  • हरे वस्त्र – प्रकृति और नवजीवन का प्रतीक
  • शिवलिंग – भगवान शिव का प्रतीक
  • फल-फूल – प्रसाद के रूप में

हरियाली तीज व्रत के नियम

इस पावन व्रत को करते समय इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • व्रत के दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखें
  • किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न करें
  • पूरे दिन सात्विक आचरण रखें
  • क्रोध, झूठ और बुरे विचारों से दूर रहें
  • सायंकाल पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें

व्रत पारण का समय

हरियाली तीज का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद ही पारण करना चाहिए। व्रत तोड़ने से पहले:

  • शिव-पार्वती का स्मरण करें
  • ब्राह्मण या किसी सुहागन को भोजन कराएं
  • पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण करें

हरियाली तीज 2025 का शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज 2025 के लिए प्रमुख तिथियाँ और समय:

  • तिथि: 28 जुलाई 2025, सोमवार
  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 27 जुलाई को रात 10:32 बजे से
  • तृतीया तिथि समाप्त: 28 जुलाई को रात 08:39 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय: प्रातः 06:00 से 10:30 तक

ज्योतिषीय महत्व

इस वर्ष हरियाली तीज का विशेष संयोग बन रहा है:

  • सावन मास का पहला सोमवार
  • शुक्ल पक्ष की तृतीया
  • रोहिणी नक्षत्र का योग
  • चंद्रमा वृषभ राशि में

हरियाली तीज की परंपराएँ

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हरियाली तीज मनाने की अनूठी परंपराएँ हैं:

राजस्थान में उत्सव

  • मेले और झूले की परंपरा
  • हाथों में मेहंदी लगाना
  • लोकगीत और घूमर नृत्य
  • श्रृंगार प्रतियोगिताएँ

उत्तर प्रदेश और बिहार में विधि

  • कजली तीज के रूप में मनाना
  • सावन के झूले
  • विशेष भजन-कीर्तन
  • सुहागिनों का एकत्रित होना

हरियाली तीज व्रत का फल

शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से मिलता है:

  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
  • संतान सुख
  • धन-धान्य की वृद्धि
  • सभी मनोकामनाओं की पूर्ति
  • मोक्ष की प्राप्ति

पौराणिक उद्धरण

स्कन्द पुराण में कहा गया है: “जो स्त्री श्रद्धापूर्वक हरियाली तीज का व्रत करती है, उसे सात जन्मों तक सुहाग का आशीर्वाद मिलता है।”

निष्कर्ष

हरियाली तीज 2025 का यह पावन पर्व हमें प्रकृति और देवी-देवताओं के साथ जुड़ने का अवसर देता है। इस लेख में हमने आपके साथ हरियाली तीज व्रत कथा और पूजा विधि का विस्तृत वर्णन किया है। आशा है आप इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करेंगे और भगवान शिव व माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

याद रखें, व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग है। हरियाली तीज की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ!

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