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Holashtak 2025 होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये काम

Holashtak 2025 starts today avoid these activities for eight days to prevent bad luck and ensure prosperity in your life

Published July 2, 2026
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3 Min Read

होलाष्टक, होली के आठ दिन पहले से शुरू होने वाला एक विशेष समय होता है। यह अवधि फाल्गुन मास की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाई जाती है। 2025 में होलाष्टक 8 मार्च से 15 मार्च तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इन दिनों में चंद्रमा और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण वातावरण में अशुभ प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए, इन आठ दिनों में कुछ विशेष कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

Contents
होलाष्टक की पौराणिक कथाहोलाष्टक 2025 में किन कामों से बचें?होलाष्टक में क्या करें?होलाष्टक के आठ दिनों का विशेष महत्वहोलाष्टक में आध्यात्मिक प्रथाएंहोलाष्टक से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य

होलाष्टक की पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, होलाष्टक के दौरान भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इसी वजह से यह समय अशुभ माना जाता है। एक अन्य मान्यता यह भी है कि होलिका दहन से पहले के ये आठ दिन उसकी नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव में होते हैं।

होलाष्टक 2025 में किन कामों से बचें?

इन आठ दिनों में कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए ताकि जीवन में सुख-शांति बनी रहे:

  • मांगलिक कार्य वर्जित: विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे शुभ कार्य न करें।
  • नए कार्य की शुरुआत न करें: नया व्यवसाय, नौकरी या यात्रा टाल दें।
  • वृक्षारोपण न करें: पेड़-पौधे लगाने से बचें क्योंकि इस समय प्रकृति में तामसिक ऊर्जा प्रबल होती है।
  • क्रोध और विवाद से दूर रहें: मन में नकारात्मक भाव न आने दें।

होलाष्टक में क्या करें?

इन दिनों में भक्ति और सात्विक जीवन जीने पर ध्यान देना चाहिए:

  • प्रतिदिन होलिका की पूजा करें: “ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।
  • दान-पुण्य करें: गरीबों को अन्न, वस्त्र दान करें।
  • सुबह स्नान के बाद इस मंत्र का पाठ करें: “फाल्गुने मासि राजेन्द्र होलाष्टक भयंकरम्। तस्मात्त्वं रक्ष मां देवि पापेभ्यो नः प्रमोचय।।”

होलाष्टक के आठ दिनों का विशेष महत्व

हर दिन का अपना अलग प्रभाव होता है:

दिन तिथि विशेष सावधानी
पहला दिन 8 मार्च (अष्टमी) किसी भी प्रकार के झगड़े से बचें
अंतिम दिन 15 मार्च (पूर्णिमा) होलिका दहन के समय विशेष सतर्कता

होलाष्टक में आध्यात्मिक प्रथाएं

इन दिनों में निम्नलिखित उपाय करने से लाभ मिलता है:

  • हनुमान चालीसा का नियमित पाठ
  • तुलसी के पौधे में प्रतिदिन जल चढ़ाएं
  • शाम को दीपक जलाकर घर की शुद्धि करें

होलाष्टक से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, फाल्गुन मास में मौसम परिवर्तन के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। होलाष्टक में बताई गई सावधानियां स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक हैं:

  • शारीरिक शुद्धि: तेल-मसालेदार भोजन से परहेज करने की सलाह
  • मानसिक संतुलन: क्रोध न करने से तनाव कम होता है

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