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Holashtak 2025 21 मार्च से होलाष्टक आरंभ जानिए क्यों अशुभ

Holashtak 2025: 21 मार्च से शुरू हो रहा है अशुभ 8 दिनों का समय। जानिए Holashtak का महत्व, मान्यताएं और इन दिनों में क्या करें-क्या न करें। पूरी जानकारी यहाँ।

Published October 31, 2026
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4 Min Read

Holashtak 2025: 21 मार्च से होलाष्टक आरंभ, जानिए इन आठ दिनों को क्यों माना गया है अशुभ

होली का त्योहार रंगों, उल्लास और भक्ति का प्रतीक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है और इन्हें अशुभ माना जाता है? 2025 में, होलाष्टक 21 मार्च से शुरू होकर 28 मार्च तक रहेगा। यह अवधि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। आइए, जानते हैं कि क्यों इन आठ दिनों में शुभ कार्यों से बचना चाहिए और कैसे इस समय को भक्ति के साथ व्यतीत किया जा सकता है।

Contents
Holashtak 2025: 21 मार्च से होलाष्टक आरंभ, जानिए इन आठ दिनों को क्यों माना गया है अशुभहोलाष्टक क्या है?होलाष्टक 2025 की तिथियाँहोलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है?होलाष्टक के दौरान क्या न करें?होलाष्टक में क्या करें?होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्वनिष्कर्ष

होलाष्टक क्या है?

होलाष्टक शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “होली” और “अष्टक” (आठ दिन)। यह होली से पहले के आठ दिनों की अवधि को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इन दिनों में शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।

होलाष्टक 2025 की तिथियाँ

  • प्रारंभ: 21 मार्च 2025 (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी)
  • समाप्ति: 28 मार्च 2025 (फाल्गुन पूर्णिमा, होलिका दहन)

होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है?

पौराणिक कथाओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के पीछे कई कारण बताए गए हैं:

  • प्रह्लाद और होलिका की कथा: मान्यता है कि इन आठ दिनों में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया था। इस दौरान नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं।
  • ग्रहों की स्थिति: ज्योतिषियों के अनुसार, होलाष्टक के दौरान सूर्य और चंद्रमा अशुभ योग बनाते हैं, जिससे कार्यों में बाधाएँ आती हैं।
  • ऋतु परिवर्तन: यह समय शीत ऋतु के अंत और ग्रीष्म के आगमन का संक्रमण काल होता है, जिसे शारीरिक और मानसिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।

होलाष्टक के दौरान क्या न करें?

इन आठ दिनों में निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:

  • विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे शुभ संस्कार
  • नए व्यवसाय या निवेश की शुरुआत
  • बड़े खरीदारी या संपत्ति लेन-देन
  • यात्रा (विशेषकर दक्षिण दिशा में)

होलाष्टक में क्या करें?

इस अवधि को भक्ति और साधना के लिए उपयुक्त माना गया है:

  • भगवान विष्णु और प्रह्लाद की आराधना करें।
  • होली की तैयारी में समय बिताएँ (जैसे प्राकृतिक रंग बनाना)।
  • दान-पुण्य करने से नकारात्मकता दूर होती है।
  • संतों या बुजुर्गों के आशीर्वाद लें।

होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्व

यद्यपि होलाष्टक को अशुभ माना जाता है, लेकिन यह आत्मशुद्धि का भी समय है। इस दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। प्रह्लाद की भक्ति की कथा हमें धैर्य और विश्वास का संदेश देती है।

निष्कर्ष

होलाष्टक का उद्देश्य हमें त्योहारों से पहले आत्मनिरीक्षण करने का अवसर देना है। 2025 में 21 से 28 मार्च तक इन आठ दिनों में भक्ति और सावधानी बरतकर हम होली के आनंद को और अधिक शुभ बना सकते हैं। याद रखें, हर अशुभ अवधि के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक सबक छिपा होता है – होलाष्टक हमें धैर्य और शुद्धता का पाठ पढ़ाता है।

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