# Indira Ekadashi 2025: इस दिन है अश्विन मास की एकादशी, जानिए तारीख, महत्व व पूर्ण पूजा विधि
प्रस्तावना
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। इंदिरा एकादशी अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पितृों की मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस लेख में हम आपको इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि, इसका महत्व, पूजा विधि और कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।
इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- इंदिरा एकादशी तिथि: 23 सितंबर 2025 (मंगलवार)
- एकादशी प्रारंभ: 22 सितंबर 2025, रात 10:14 बजे
- एकादशी समाप्त: 23 सितंबर 2025, रात 08:30 बजे
- पारण समय: 24 सितंबर, सुबह 06:13 से 08:30 बजे तक
इंदिरा एकादशी का महत्व
इंदिरा एकादशी का व्रत पितृदोष से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्रती को धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह एकादशी पितृ पक्ष के समीप आती है, इसलिए इसे पितृ तर्पण के लिए विशेष माना जाता है।
इंदिरा एकादशी व्रत के लाभ
- पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
- कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं।
- धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इंदिरा एकादशी व्रत की पूजा विधि
इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
व्रत से पहले की तैयारी
- दशमी के दिन सात्विक भोजन करें और रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का स्मरण करें।
पूजा विधि
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- तुलसी दल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- इस मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- पितरों के नाम से तर्पण करें और उनकी शांति की प्रार्थना करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
व्रत पारण (अगले दिन)
- द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके ब्राह्मण को भोजन कराएं।
- फिर स्वयं फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।
इंदिरा एकादशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाराज इंद्रसेन एक धर्मात्मा राजा थे। एक बार महर्षि नारद ने उन्हें इंदिरा एकादशी का महत्व बताया। राजा ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा से किया, जिससे उनके पिता स्वर्ग से मुक्त हो गए। तभी से यह व्रत पितृ मोक्ष के लिए प्रसिद्ध हुआ।
निष्कर्ष
इंदिरा एकादशी का व्रत पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने वाला और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय है। 23 सितंबर 2025 को इस पावन एकादशी को श्रद्धापूर्वक मनाएं और पूजा विधि का पालन करके पुण्य लाभ प्राप्त करें।
हरि ॐ तत्सत्।
