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जगन्नाथ यात्रा रथ खींचने से मिलता है मोक्ष Jagannath Yatra Rath Khinchne Se Milta Hai Moksh

जगन्नाथ यात्रा में रथ खींचने का महत्व जानें और कैसे यह मोक्ष प्रदान करता है। इस पवित्र यात्रा की पूरी जानकारी पाएं और आध्यात्मिक लाभ उठाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

जगन्नाथ यात्रा – यहां रथ खींचने से मिलता है मोक्ष

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और भव्य आयोजनों में से एक है। यह यात्रा न केवल भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि मोक्ष प्राप्ति का एक दिव्य मार्ग भी मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि रथ खींचने वाले भक्तों को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। इस लेख में हम जगन्नाथ यात्रा की महिमा, इसके पीछे की पौराणिक कथाएं और रथ खींचने के पुण्य के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Contents
जगन्नाथ यात्रा – यहां रथ खींचने से मिलता है मोक्षजगन्नाथ यात्रा का पौराणिक महत्वरथ खींचने से मिलता है मोक्षरथयात्रा की विशेष परंपराएंजगन्नाथ यात्रा 2024 की तिथियांकैसे पहुंचें जगन्नाथ पुरी?निष्कर्ष

जगन्नाथ यात्रा का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के देहावसान के बाद उनके अधूरे शरीर को एक विशाल रथ पर रखकर पुरी ले जाया गया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। इस यात्रा को “गुंडिचा यात्रा” भी कहा जाता है, क्योंकि भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी गुंडिचा के घर जाते हैं।

  • यह यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आरंभ होती है।
  • तीनों देवता – जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अलग-अलग रथों में विराजमान होते हैं।
  • भगवान जगन्नाथ का रथ “नंदीघोष” कहलाता है, जिसमें 16 पहिए होते हैं।

रथ खींचने से मिलता है मोक्ष

शास्त्रों में कहा गया है:

“रथं तु यः समाकर्षेत् स पुमान् मोक्षमाप्नुयात्।”
(जो व्यक्ति रथ खींचता है, वह मोक्ष प्राप्त करता है।)

रथयात्रा के दौरान लाखों भक्त रस्सा खींचकर भगवान के रथ को आगे बढ़ाने का पुण्य कमाते हैं। मान्यता है कि:

  • रथ का स्पर्श मात्र ही पापों का नाश कर देता है।
  • रथ खींचने वाला व्यक्ति अपने सात पीढ़ियों के पापों से मुक्त हो जाता है।
  • इससे भक्ति, मुक्ति और शक्ति तीनों की प्राप्ति होती है।

रथयात्रा की विशेष परंपराएं

1. चेरा पहरा की परंपरा

ओडिशा के राजा (गजपति महाराज) स्वयं सोने की झाड़ू लेकर रथ के सामने सफाई करते हैं। यह परंपरा “चेरा पहरा” कहलाती है, जो भगवान और भक्त के बीच समानता का प्रतीक है।

2. रथ निर्माण की विधि

  • रथों का निर्माण नीम की लकड़ी से किया जाता है।
  • इन्हें बनाने वाले कारीगरों को “महाराणा” कहा जाता है।
  • रथ निर्माण में किसी कील या लोहे का प्रयोग नहीं किया जाता।

जगन्नाथ यात्रा 2024 की तिथियां

इस वर्ष जगन्नाथ यात्रा का आयोजन 7 जुलाई 2024 को होगा। मुख्य यात्रा के बाद भगवान 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजेंगे और 17 जुलाई को वापसी यात्रा (बहुदा यात्रा) होगी।

कैसे पहुंचें जगन्नाथ पुरी?

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर (60 किमी दूर)
  • रेल मार्ग: पुरी रेलवे स्टेशन सीधे देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है
  • सड़क मार्ग: ओडिशा के सभी प्रमुख शहरों से बस सेवाएं उपलब्ध

निष्कर्ष

जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का महापर्व है। रथ खींचने की इस पावन परंपरा में भाग लेकर भक्त भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं। जैसा कि स्कंद पुराण में कहा गया है:

“पुरुषोत्तमक्षेत्रं यत्र साक्षात् जगन्नाथः।
तत्र गत्वा नरो यस्तु रथं याति हरेः प्रियम्।
स याति परमं स्थानं यत्र गत्वा न शोचति॥”

(जो मनुष्य पुरुषोत्तम क्षेत्र में जाकर भगवान हरि के प्रिय रथ को खींचता है, वह परम पद को प्राप्त करता है, जहाँ जाने के बाद कभी दुःख नहीं होता।)

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