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Janki Jayanti 2025 जानकी जयंती कब शुभ मुहूर्त पूजा विधि महत्व

Published June 26, 2026
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6 Min Read

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Contents
जानकी जयंती 2025: माता सीता के आविर्भाव का पावन पर्वजानकी जयंती 2025: तिथि और शुभ मुहूर्तजानकी जयंती का धार्मिक महत्वजानकी जयंती पूजन विधिपूजा की तैयारीमुख्य पूजन विधिविशेष आहुति मंत्रजानकी जयंती व्रत कथाजानकी जयंती पर विशेष उपायप्रमुख मंदिरों में जानकी जयंती उत्सव1. जानकी मंदिर, जनकपुर (नेपाल)2. सीता रसोई, अयोध्या3. सीता समाहित स्थल, सीतामढ़ी (बिहार)जानकी जयंती का आधुनिक संदेशनिष्कर्ष

जानकी जयंती 2025: माता सीता के आविर्भाव का पावन पर्व

हिंदू धर्म में माता सीता, जिन्हें जानकी के नाम से भी जाना जाता है, श्रीराम की अर्धांगिनी और आदर्श नारीत्व की प्रतिमूर्ति हैं। जानकी जयंती का पर्व माता सीता के धरती पर अवतरण के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 2025 में यह पावन तिथि विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण होगी। आइए जानते हैं इस पर्व की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

जानकी जयंती 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, जानकी जयंती हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। 2025 में यह पर्व 7 मई, बुधवार को पड़ रहा है।

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 6 मई 2025 को रात 10:15 बजे से
  • नवमी तिथि समाप्त: 7 मई 2025 को रात 08:30 बजे तक
  • शुभ पूजा मुहूर्त: प्रातः 06:30 बजे से 10:00 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से 12:30 बजे तक

जानकी जयंती का धार्मिक महत्व

माता सीता का जन्म मिथिला नरेश राजा जनक के यहाँ हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा जनक हल से भूमि जोत रहे थे, तभी धरती से एक कन्या प्रकट हुईं जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण उनका नाम जानकी पड़ा।

  • माता सीता शक्ति, पवित्रता और समर्पण की प्रतीक हैं
  • यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है
  • इस दिन व्रत रखने से पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है
  • माता सीता की कृपा से वैवाहिक जीवन में सद्भाव बढ़ता है

जानकी जयंती पूजन विधि

पूजा की तैयारी

  • प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (पीले या लाल रंग को प्राथमिकता दें)
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएँ
  • माता सीता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें

मुख्य पूजन विधि

  1. सर्वप्रथम गणेश जी का स्मरण करें: “ॐ गं गणपतये नमः”
  2. माता सीता को पुष्प, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें
  3. धूप-दीप जलाकर आरती करें
  4. इस मंत्र का जाप करें: “ॐ सीतायै नमः” 108 बार
  5. सीता-राम के युगल रूप की आराधना करें
  6. जानकी जयंती व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें

विशेष आहुति मंत्र

हवन करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ भूर्भुवः स्वः जानक्यै स्वाहा”

जानकी जयंती व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में जब राजा जनक हल से भूमि जोत रहे थे, तब उन्हें भूमि से एक दिव्य कन्या प्राप्त हुई। इस कन्या को ही माता सीता के रूप में जाना गया। मिथिला में इस दिन को सीता नवमी के रूप में भी मनाया जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, माता सीता वेदवती का पुनर्जन्म थीं जिन्होंने रावण के वध के लिए श्रीराम की सहधर्मिणी के रूप में अवतार लिया। इसीलिए इस दिन माता सीता के साथ-साथ श्रीराम की भी पूजा की जाती है।

जानकी जयंती पर विशेष उपाय

  • गरीबों को भोजन दान: इस दिन कन्या भोज का विशेष महत्व है
  • वस्त्र दान: सुहागिन स्त्रियों को लाल वस्त्र दान करें
  • सीता-राम चालीसा: का पाठ करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है
  • जौ और तिल: का दान करने से पितृ दोष शांत होते हैं

प्रमुख मंदिरों में जानकी जयंती उत्सव

1. जानकी मंदिर, जनकपुर (नेपाल)

माता सीता की जन्मस्थली पर स्थित इस मंदिर में जानकी जयंती को तीन दिवसीय उत्सव मनाया जाता है। भक्त यहाँ विशेष रथयात्रा और भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं।

2. सीता रसोई, अयोध्या

मान्यता है कि यहाँ माता सीता ने श्रीराम और लक्ष्मण के लिए भोजन बनाया था। जानकी जयंती पर यहाँ अखंड रामायण पाठ का आयोजन होता है।

3. सीता समाहित स्थल, सीतामढ़ी (बिहार)

इस पावन स्थल पर जानकी जयंती पर विशाल मेला लगता है जहाँ लाखों श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए आते हैं।

जानकी जयंती का आधुनिक संदेश

माता सीता का जीवन आज के युग में भी प्रासंगिक है। उन्होंने सिखाया कि:

  • कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य न खोएँ
  • पतिव्रत धर्म का पालन करें पर स्वाभिमान न छोड़ें
  • प्रकृति से गहरा जुड़ाव रखें (माता सीता को धरती पुत्री माना जाता है)
  • सादगी और सेवा भाव को जीवन में अपनाएँ

निष्कर्ष

जानकी जयंती का पावन पर्व हमें माता सीता के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संदेश देता है। 7 मई 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर श्रद्धापूर्वक व्रत-पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। माता सीता की कृपा से हर भक्त को धैर्य, शक्ति और विवेक की प्राप्ति होती है। आइए, इस जानकी जयंती पर माता के चरणों में अपना श्रद्धा-सुमन अर्पित करें और उनके आशीर्वाद से पावन जीवन की प्राप्ति करें।

ॐ सीतायै नमः, ॐ जानक्यै नमः, ॐ रामाय नमः

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