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Jivitputrika Vrat 2025: जीवित्पुत्रिका व्रत की 5 जरूरी सावधानियां

जीवित्पुत्रिका व्रत 2025 में सफलता पाने के लिए इन 5 जरूरी सावधानियों को जानें। व्रत का पूरा लाभ उठाने के लिए ये टिप्स अपनाएं और संतान की दीर्घायु व कुशलता प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

जीवित्पुत्रिका व्रत 2025: पूजा विधि और महत्व

जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जिउतिया व्रत भी कहते हैं, हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए माताओं द्वारा किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत 2025 में 18 सितंबर को मनाया जाएगा। इस व्रत में कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए, नहीं तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं इन्हीं नियमों के बारे में विस्तार से।

Contents
जीवित्पुत्रिका व्रत 2025: पूजा विधि और महत्वजीवित्पुत्रिका व्रत का पौराणिक महत्वजीवित्पुत्रिका व्रत में बरतें ये 5 सावधानियां1. निर्जल व्रत का पालन2. सूतक काल में व्रत न करें3. काले वस्त्र धारण न करें4. लोहे के बर्तनों का उपयोग न करें5. व्रत कथा सुनने का नियमजीवित्पुत्रिका व्रत की विधिसुबह का संकल्पशाम की पूजा विधिविशेष टिप्सनिष्कर्ष

जीवित्पुत्रिका व्रत का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, यह व्रत माता जीवित्पुत्रिका (संतान की रक्षा करने वाली देवी) को समर्पित है। कथा के अनुसार, एक गिद्धनी ने अपने मृत बच्चे को जीवित करने के लिए घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उसके पुत्र को जीवनदान दिया। तभी से यह व्रत संतान की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

जीवित्पुत्रिका व्रत में बरतें ये 5 सावधानियां

1. निर्जल व्रत का पालन

इस व्रत में निराहार और निर्जल रहने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि:

  • व्रत के दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें
  • यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार ले सकते हैं, पर जल न पिएं
  • व्रत तोड़ने का समय अगले दिन सूर्योदय के बाद ही माना जाता है

2. सूतक काल में व्रत न करें

यदि परिवार में किसी की मृत्यु हुई हो या सूतक चल रहा हो, तो व्रत नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में:

  • व्रत टाल दें या पंडित से परामर्श लें
  • सूतक समाप्ति के बाद अगले वर्ष व्रत रखें

3. काले वस्त्र धारण न करें

इस व्रत में काले या गहरे रंग के वस्त्र वर्जित माने गए हैं। ध्यान रखें:

  • सफेद, पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें
  • काले रंग को अशुभ माना जाता है
  • सादगीपूर्ण वस्त्रों में ही पूजा करें

4. लोहे के बर्तनों का उपयोग न करें

पूजन सामग्री तैयार करते समय:

  • लोहे के बर्तनों से परहेज करें
  • मिट्टी, पीतल या चांदी के पात्र उपयोग में लाएं
  • खासतौर पर नैवेद्य और जल कलश के लिए

5. व्रत कथा सुनने का नियम

व्रत की सफलता के लिए कथा श्रवण अनिवार्य है:

  • पूजा के बाद कथा अवश्य सुनें
  • पारंपरिक कथा ही सुनें, संक्षिप्त रूप न अपनाएं
  • कथा सुनते समय मन को एकाग्र रखें

जीवित्पुत्रिका व्रत की विधि

सुबह का संकल्प

प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर:

  • साफ स्थान पर आसन बिछाएं
  • हाथ में जल, फूल और चावल लेकर संकल्प लें
  • संकल्प मंत्र: “ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य एतत् जीवित्पुत्रिका व्रतम् अहं करिष्ये…”

शाम की पूजा विधि

संध्या समय इस प्रकार पूजा करें:

  • मिट्टी की मूर्ति या कलश स्थापित करें
  • दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
  • फल, मिठाई और विशेष भोजन का भोग लगाएं

विशेष टिप्स

  • कथा पुस्तक पहले से तैयार रखें
  • पूजा सामग्री में दूर्वा घास अवश्य शामिल करें
  • व्रत के अगले दिन ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व है

निष्कर्ष

जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की रक्षा और दीर्घायु का अद्भुत व्रत है। यदि उपरोक्त पांच सावधानियां ध्यान में रखकर व्रत किया जाए, तो निश्चित ही माताओं की मनोकामना पूर्ण होती है। 2025 में इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से करने का संकल्प लें।

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