हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास एक महत्वपूर्ण समय है जो भगवान विष्णु और शिवजी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस वर्ष यह मास 5 जून को समाप्त हो रहा है। शेष बचे हुए दिनों का सदुपयोग करने के लिए आइए जानते हैं कि किन कार्यों को करने से पुण्य की प्राप्ति होगी और किन चीजों से बचना चाहिए।
ज्येष्ठ मास का महत्व
ज्येष्ठ मास को “ज्येष्ठा नक्षत्र” के नाम से भी जाना जाता है। यह मास तपस्या, दान और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पुराणों में कहा गया है कि इस माह में किया गया पुण्य कर्म अक्षय फल देता है।
- इस मास में गंगा स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व है।
- ज्येष्ठ मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
- शिवजी की आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शेष बचे दिनों में क्या करें?
1. प्रातःकाल स्नान और दान
ज्येष्ठ मास में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद तिल, जल, फल या वस्त्र का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
2. मंत्र जाप और पूजा
इन दिनों में निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए:
- विष्णु मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- शिव मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”
इसके अलावा, गायत्री मंत्र का जाप भी लाभकारी होता है।
3. व्रत और उपवास
ज्येष्ठ मास में सोमवार और गुरुवार का व्रत रखना शुभ माना जाता है। फलाहार या एक समय भोजन करके व्रत करने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।
4. पीपल की पूजा
इस मास में पीपल के वृक्ष की पूजा करना और जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी होता है। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
ज्येष्ठ मास में क्या न करें?
1. अनावश्यक यात्रा से बचें
ज्येष्ठ मास में अधिक गर्मी होती है, इसलिए अनावश्यक यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करनी ही हो तो जल साथ रखें और सूर्य की किरणों से बचाव करें।
2. क्रोध और नकारात्मक विचार
इस मास में मन को शांत रखना चाहिए। क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचारों से दूर रहें, क्योंकि ये आपके पुण्य कर्मों को प्रभावित कर सकते हैं।
3. मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें
ज्येष्ठ मास में सात्विक आहार लेना चाहिए। मांसाहार, मदिरा या तामसिक भोजन से दूर रहें, क्योंकि ये आपकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते हैं।
ज्येष्ठ मास के शुभ अवसर
शेष बचे दिनों में कुछ विशेष तिथियां हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए:
- वट सावित्री व्रत: यह व्रत सौभाग्य और दीर्घायु के लिए किया जाता है।
- गंगा दशहरा: इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
ज्येष्ठ मास के अंतिम दिनों का सदुपयोग करके हम अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं। भक्ति, दान और सदाचार से इस मास को पवित्र बनाएं और ईश्वर की कृपा प्राप्त करें।
आशा है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। हरि ओम!

