Kaal Bhairav Jayanti 2025: 5 दिसंबर को कालभैरव जयंती, जानिए महत्व, पूजाविधि और मंत्र
भगवान शिव के रौद्र अवतार कालभैरव की जयंती हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। 5 दिसंबर 2025 को मनाई जाने वाली इस पावन तिथि पर भक्तों द्वारा कालभैरव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। आइए जानते हैं इस पर्व का धार्मिक महत्व, सरल पूजा विधि और मोक्षदायी मंत्रों के बारे में…
कालभैरव जयंती का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को कालभैरव जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों में इसे “भैरव अष्टमी” भी कहा गया है। यह पर्व भगवान भैरव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
पौराणिक कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी ने शिवजी का अपमान कर दिया। इस पर क्रोधित होकर शिवजी के तेज से कालभैरव प्रकट हुए, जिन्होंने ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काट दिया। बाद में, भैरवजी को ब्रह्महत्या का दोष लगा, जिससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें काशी में आना पड़ा। यहीं पर उन्हें कालभैरव (काशी के कोतवाल) का पद प्राप्त हुआ।
आध्यात्मिक महत्व
- कालभैरव को कर्मफल दाता और न्यायाधीश माना जाता है
- इनकी पूजा से भक्तों को भय, शत्रु बाधा और आकस्मिक दुर्घटनाओं से मुक्ति मिलती है
- तंत्र साधना में इनका विशेष स्थान है
- काशी में कालभैरव की पूजा अनिवार्य मानी गई है
कालभैरव जयंती 2025 की पूजा विधि
5 दिसंबर 2025 को इस विशेष दिन पर निम्न विधि से पूजन करने से अद्भुत फल प्राप्त होते हैं:
सुबह की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण करें (काले या लाल रंग को प्राथमिकता दें)
- घर के मंदिर या पूजास्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
पूजा सामग्री
- कालभैरव की मूर्ति/चित्र
- लाल/काले फूल, बेलपत्र, धतूरा
- सिंदूर, चंदन, काले तिल
- उड़द की दाल, गुड़, शराब (प्रसाद रूप में)
- दीपक, धूप, अगरबत्ती
विस्तृत पूजन विधि
- सर्वप्रथम भैरवजी को जल, फूल और अक्षत अर्पित करें
- चंदन का तिलक लगाएं और काले तिल अर्पित करें
- धूप-दीप दिखाकर “ॐ भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें
- भैरव चालीसा या कालभैरव अष्टक का पाठ करें
- शाम के समय काले कुत्ते को भोजन कराएं (भैरव का वाहन)
- रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करें
कालभैरव के विशेष मंत्र
इन मंत्रों के नियमित जप से भैरवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है:
मूल मंत्र
“ॐ भैरवाय नमः”
(108 बार जाप करने से सभी प्रकार के भय दूर होते हैं)
कालभैरव गायत्री मंत्र
“ॐ कालभैरवाय विद्महे
काशी कोतवालाय धीमहि
तन्नो भैरव: प्रचोदयात्”
तंत्र मंत्र
“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ”
(संकट निवारण हेतु प्रभावी)
मंत्र जप के नियम
- रुद्राक्ष की माला से जप करें
- मंत्र सिद्धि के लिए 1.25 लाख जप करें
- जप के पूर्व भैरवजी से अनुमति लें
- मंत्र दीक्षा लेना श्रेयस्कर है
कालभैरव जयंती के विशेष उपाय
कर्ज मुक्ति हेतु
कालभैरव मंदिर में काले तिल, उड़द दाल और गुड़ का दान करें।
शत्रु बाधा निवारण
मध्यरात्रि में “ॐ ह्रीं भैरवाय फट्” मंत्र का 108 बार जप करें।
नौकरी/व्यवसाय में सफलता
काले कुत्ते को शनिवार को मीठी रोटी खिलाएं।
प्रमुख कालभैरव मंदिर
- काशी कालभैरव मंदिर (वाराणसी) – यहां भैरवजी काशी के कोतवाल हैं
- उज्जैन का बटुक भैरव मंदिर – तांत्रिक सिद्धियों का केंद्र
- कालंजर का भैरव मंदिर (उत्तर प्रदेश)
- नैनीताल का भैरव मंदिर
निष्कर्ष
कालभैरव जयंती 2025 का पर्व 5 दिसंबर को मनाया जाएगा। इस दिन साधक भैरवजी की विधिवत पूजा करके जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। याद रखें, कालभैरव उन्हीं पर प्रसन्न होते हैं जो निडर होकर धर्म का पालन करते हैं और अन्याय का विरोध करते हैं। इस पावन अवसर पर भैरवजी के मंत्रों का जाप करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
आप सभी को कालभैरव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏
