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श्रावण में 12 ज्योतिर्लिंग पूजा का महत्व और मान्यताएं

जानें श्रावण मास में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व और प्रमुख मान्यताएं। इस पावन महीने में भगवान शिव की आराधना के विशेष लाभ और आध्यात्मिक फल प्राप्त करने का सही तरीका जानें।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

जानें श्रावण मास में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख मान्यताएं

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस पावन माह में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रावण में इन ज्योतिर्लिंगों की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए, जानते हैं श्रावण मास में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख मान्यताएं।

Contents
जानें श्रावण मास में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख मान्यताएं12 ज्योतिर्लिंगों का परिचय12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थानश्रावण मास में ज्योतिर्लिंग पूजा का महत्वप्रमुख लाभज्योतिर्लिंग पूजा से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग2. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग3. विश्वनाथ ज्योतिर्लिंगश्रावण में ज्योतिर्लिंग पूजा की विधिश्रावण मास के विशेष पर्वनिष्कर्ष

12 ज्योतिर्लिंगों का परिचय

हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है। ये ज्योतिर्लिंग भारत के विभिन्न कोनों में स्थित हैं और प्रत्येक की अपनी एक विशेष कथा एवं महत्ता है। श्रावण मास में इनकी पूजा करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान

  • सोमनाथ ज्योतिर्लिंग – गुजरात
  • मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – आंध्र प्रदेश
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – मध्य प्रदेश
  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग – मध्य प्रदेश
  • केदारनाथ ज्योतिर्लिंग – उत्तराखंड
  • भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र
  • विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – उत्तर प्रदेश
  • त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र
  • वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग – झारखंड
  • नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – गुजरात
  • रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग – तमिलनाडु
  • घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र

श्रावण मास में ज्योतिर्लिंग पूजा का महत्व

श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह में समुद्र मंथन के दौरान विषपान के पश्चात भगवान शिव ने अपने कंठ को ठंडक पहुंचाने के लिए चंद्रमा को धारण किया था। इसलिए श्रावण में शिवलिंग पर जल चढ़ाने (जलाभिषेक) का विशेष महत्व है।

प्रमुख लाभ

  • कुंडली के सभी दोषों का निवारण
  • आयु, आरोग्य और समृद्धि में वृद्धि
  • पितृ दोष से मुक्ति
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति

ज्योतिर्लिंग पूजा से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं

1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

मान्यता है कि श्रावण में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है। यहां “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

2. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ की यात्रा श्रावण में सबसे पुण्यदायी मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। केदारनाथ में बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है।

3. विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

काशी विश्वनाथ में श्रावण सोमवार के दिन पूजा करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं। यहां रुद्राभिषेक कराने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

श्रावण में ज्योतिर्लिंग पूजा की विधि

श्रावण मास में ज्योतिर्लिंगों की पूजा करने के लिए निम्न विधि अपनाई जा सकती है:

  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं
  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें
  • बिल्व पत्र, धतूरा, अक्षत और फूल अर्पित करें
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…”
  • आरती करके प्रसाद वितरित करें

श्रावण मास के विशेष पर्व

श्रावण मास में कुछ विशेष पर्वों पर ज्योतिर्लिंगों की पूजा का अतिरिक्त महत्व है:

  • श्रावण सोमवार: प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना
  • हरियाली तीज: सुहागिनों द्वारा शिव-पार्वती की पूजा
  • नाग पंचमी: भगवान शिव के आभूषण नागों की पूजा
  • रक्षा बंधन: भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व

निष्कर्ष

श्रावण मास में 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा करने से भक्तों को अनेकानेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह महीना आध्यात्मिक उन्नति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम समय है। भले ही आप सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन न कर पाएं, लेकिन श्रावण में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर, रुद्राभिषेक करके और मन से पूजा करके आप भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ॐ नमः शिवाय के मंत्र का जाप करते हुए इस पावन माह में अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करें और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें

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