भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर मौसम और हर संस्कृति के रंग देखने को मिलते हैं। मकर संक्रांति से ठीक दो दिन पहले, लोहड़ी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी न केवल फसल की कटाई का प्रतीक है, बल्कि यह नए साल की शुरुआत और सूर्य देवता की आराधना का भी पर्व है।
लोहड़ी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
कृषि और प्रकृति से जुड़ाव
- लोहड़ी रबी की फसल के पकने की खुशी में मनाई जाती है।
- इस दिन किसान भगवान से अगली फसल के लिए अच्छी बारिश और उपज की प्रार्थना करते हैं।
- यह त्योहार सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का संकेत देता है।
धार्मिक मान्यताएँ
पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की कहानी से जोड़ा जाता है। दुल्ला भट्टी एक लोकनायक थे, जिन्होंने गरीब लड़कियों की शादी करवाकर उन्हें सम्मान दिलाया। इसी कारण लोहड़ी के गीतों में उनका नाम गर्व से लिया जाता है।
लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?
अग्नि की पूजा और परिक्रमा
- शाम के समय लोग अलाव जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हुए गीत गाते हैं।
- अग्नि में तिल, गुड़, मूँगफली और मक्के की खील चढ़ाई जाती है।
- मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
पारंपरिक गीत और नृत्य
“सुंदर मुंदरिए हो…” जैसे लोकगीत गाते हुए लोग ढोल की थाप पर नाचते हैं। यह त्योहार सामुदायिक एकता को बढ़ाता है।
मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान
- लोहड़ी पर गजक, रेवड़ी और मूँगफली खाने और बाँटने का विशेष महत्व है।
- नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं को विशेष आशीर्वाद दिया जाता है।
लोहड़ी और मकर संक्रांति का संबंध
लोहड़ी के दो दिन बाद मकर संक्रांति मनाई जाती है। दोनों ही त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने और ऋतु परिवर्तन का संकेत देते हैं। जहाँ लोहड़ी में अग्नि पूजा की जाती है, वहीं मकर संक्रांति पर सूर्य देव की आराधना होती है।
लोहड़ी की शुभकामनाएँ और संदेश
यह त्योहार हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और समाज में प्रेम बढ़ाने का संदेश देता है। आइए, इस लोहड़ी पर हम सभी मिलकर नए सपने देखें और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ दें।
लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

