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Maa Brahmacharini Aarti: नवरात्रि दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करें

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और उनका आशीर्वाद पाएं। इस लेख में जानें मां ब्रह्मचारिणी आरती के बोल, महत्व और पूजा विधि।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

मां ब्रह्मचारिणी आरती: नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा का महत्व

नवरात्रि के पावन पर्व के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-आराधना की जाती है। यह दिन संयम, तपस्या और आत्मानुशासन को समर्पित है। मां की इस आरती के माध्यम से भक्त उन्हें प्रसन्न कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस आरती का महत्व, विधि और पूजन के रहस्यमयी लाभ।

Contents
मां ब्रह्मचारिणी आरती: नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा का महत्वमां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप एवं महत्वमां ब्रह्मचारिणी आरती: पूर्ण पाठ एवं अर्थआरती का पाठआरती का अर्थनवरात्रि के दूसरे दिन पूजन विधिसुबह की रस्मेंमंत्र जाप एवं आरतीमां ब्रह्मचारिणी की कथा एवं प्रतीकात्मकतामां ब्रह्मचारिणी आरती के लाभविशेष टिप्स: नवरात्रि के दूसरे दिन क्या करें?निष्कर्ष: आरती का सार

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप एवं महत्व

मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘ब्रह्म’ (तपस्या) और ‘चारिणी’ (आचरण करने वाली)। इनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी एवं सौम्य है:

  • दाहिने हाथ में जप की माला
  • बाएं हाथ में कमंडल धारण किए हुए
  • सफेद वस्त्रों से सुशोभित
  • चेहरे पर तपस्या से प्राप्त तेज

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया था। इसीलिए इनकी पूजा से मनोबल, धैर्य और संकल्प शक्ति बढ़ती है।

मां ब्रह्मचारिणी आरती: पूर्ण पाठ एवं अर्थ

आरती का पाठ

जय अम्बे ब्रह्मचारिणी, तुम्हें नमो नमः। 
तपस्या ज्ञान दायिनी, शक्ति की धाम॥

माला कमंडल धारिणी, तेज अमित अपार। 
हिमालय घर जन्मी, पूजें सब संसार॥

व्रत उपवास रखने वाले, तुमसे पावें बल। 
मनवांछित फल दात्री, करो कृपा निर्मल॥

जय अम्बे ब्रह्मचारिणी, तुम्हें नमो नमः। 
तपस्या ज्ञान दायिनी, शक्ति की धाम॥

आरती का अर्थ

  • प्रथम चरण: मां को तपस्या और ज्ञान की देवी बताते हुए नमन
  • द्वितीय चरण: उनके स्वरूप (माला-कमंडल) एवं जन्मस्थान (हिमालय) का वर्णन
  • तृतीय चरण: भक्तों के व्रत को सफल बनाने एवं मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मांगना

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजन विधि

सुबह की रस्में

  • प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लाल कपड़ा बिछाएं
  • मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
  • सफेद फूल, चंदन एवं शक्कर का भोग लगाएं (मां को प्रिय)

मंत्र जाप एवं आरती

इस मंत्र का 108 बार जाप करें:

“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः”

संध्या समय दीप जलाकर आरती करें। आरती के बाद कुमकुम और अक्षत से मां का टीका करें।

मां ब्रह्मचारिणी की कथा एवं प्रतीकात्मकता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ने पार्वती रूप में हिमालय राजा के घर जन्म लिया। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने:

  • 3000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाकर तपस्या की
  • अगले 3000 वर्ष तक सिर्फ पत्ते खाए
  • बिना अन्न-जल के 1000 वर्ष तक तप किया

इस कठोर साधना से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया। यह कथा हमें सिखाती है कि संकल्प और निष्ठा से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

मां ब्रह्मचारिणी आरती के लाभ

  • मानसिक शक्ति: विद्यार्थियों को स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता मिलती है
  • संयम: मन के विकारों पर नियंत्रण पाने में सहायक
  • कर्मठता: कठिन परिश्रम करने की प्रेरणा मिलती है
  • आध्यात्मिक उन्नति: साधकों को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है

विशेष टिप्स: नवरात्रि के दूसरे दिन क्या करें?

  • इस दिन सफेद वस्त्र पहनें (मां का प्रिय रंग)
  • भोग में शक्कर या मिश्री अवश्य चढ़ाएं
  • यदि संभव हो तो पूरे दिन फलाहार करें
  • मां के मंत्र का जाप करते समय रुद्राक्ष की माला उपयोग करें

निष्कर्ष: आरती का सार

नवरात्रि के दूसरे दिन की यह आरती हमें सिखाती है कि जीवन में अनुशासन और लगन से ही सफलता मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्तों को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इस पावन अवसर पर पूर्ण श्रद्धा से आरती करें और मां का आशीर्वाद प्राप्त करें।

ध्यान रखें: आरती के बाद प्रसाद को सभी परिवारजनों में वितरित करें और मां का आशीर्वाद स्मरण करते हुए दिन की शुरुआत करें।

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