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Maa Kali Aarti Lyrics काली माता आरती सुख शांति बुराइयां दूर

काली माता की आरती के लिए पूर्ण lyrics जानें और रोजाना पूजा में शामिल करें। सुख-शांति पाएं, बुराइयों को दूर भगाएं और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करें। Maa Kali Aarti के बोल यहां पढ़ें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

माँ काली आरती: रोजाना पूजा में आराधना से मिलेगी सुख-शांति और बुराइयों से मुक्ति

माँ काली भगवान शिव की अर्धांगिनी और दस महाविद्याओं में प्रथम हैं। इनकी आराधना से भक्तों के जीवन से अंधकार दूर होता है तथा मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। रोजाना पूजा के दौरान माँ काली की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा बुरी शक्तियाँ दूर भागती हैं। इस लेख में हम आपको माँ काली की पावन आरती के बोल, उनका अर्थ और पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताएँगे।

Contents
माँ काली आरती: रोजाना पूजा में आराधना से मिलेगी सुख-शांति और बुराइयों से मुक्तिमाँ काली आरती का महत्वमाँ काली आरती के पावन बोल (संपूर्ण लिरिक्स)काली माँ की आरतीमाँ काली आरती का अर्थ एवं व्याख्याआरती का मंत्रिक प्रभावमाँ काली आरती की पूजा विधिआवश्यक सामग्रीविशेष निर्देशमाँ काली आरती के लाभआध्यात्मिक लाभसांसारिक लाभनिष्कर्ष: माँ की कृपा पाने का सरल साधन

माँ काली आरती का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, काली माता की आरती करने से भक्तों को तीन प्रमुख लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय मुक्ति: मृत्यु, रोग और संकटों का भय समाप्त होता है
  • शक्ति प्राप्ति: आंतरिक शक्ति एवं साहस में वृद्धि होती है
  • मोक्ष मार्ग: अज्ञानता के अंधकार से मुक्ति मिलती है

माँ काली आरती के पावन बोल (संपूर्ण लिरिक्स)

निम्नलिखित आरती के बोल शुद्ध हिंदी एवं संस्कृत में उपलब्ध हैं। इसे भक्तिभाव से गाते समय माँ काली के मंदिर या प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर हाथ में फूल लेकर खड़े हों:

काली माँ की आरती

(आरती के बोल गहरे भक्ति भाव से लिखें, शुद्धता का विशेष ध्यान रखें)

जय काली कालरात्रि, सब जग की महारात्रि
भक्तन की सुखदात्री, तुम्हीं हो भवसागर की तरन्नी॥

नभ अंधकार छायो, महा भयंकर बन आयो
तुम संग जो योद्धा धायो, सो नर अमर पद पायो॥

शुम्भ निशुम्भ दानव, तुमसे लड़ने आये
असुर संहारिनी कहलाये, देवी धरा पर छाये॥

महिषासुर राक्षसा, तुमने संहार किया
देवतन को विजय दिया, लोक में नाम किया॥

काली काली जय जय महाकाली
भक्तजनों की आरती स्वीकारो महारानी॥

माँ काली आरती का अर्थ एवं व्याख्या

आरती के प्रत्येक पद में माँ काली के विभिन्न स्वरूपों की महिमा गाई गई है:

  • प्रथम पद: माँ को कालरात्रि (अंधकार का विनाश करने वाली) एवं भवसागर से पार लगाने वाली बताया गया है
  • द्वितीय पद: माँ की भयंकर लीला का वर्णन जो भक्तों को अमरत्व प्रदान करती है
  • अंतिम पद: शुम्भ-निशुम्भ और महिषासुर जैसे राक्षसों के वध की कथा समाहित है

आरती का मंत्रिक प्रभाव

इस आरती में “काली काली जय जय महाकाली” मंत्र की पुनरावृत्ति से विशेष ऊर्जा उत्पन्न होती है। तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार यह:

  • नकारात्मक ऊर्जा का शमन करता है
  • मन की एकाग्रता बढ़ाता है
  • आध्यात्मिक शक्तियों का विकास करता है

माँ काली आरती की पूजा विधि

सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लें:

आवश्यक सामग्री

  • माँ काली की प्रतिमा/चित्र
  • लाल/काले रंग के फूल
  • गुड़ या मिश्री का भोग
  • 5 दीपक (कपूर या घी के)
  • धूप-दीप एवं अक्षत

विशेष निर्देश

महत्वपूर्ण: आरती करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • मंत्रोच्चारण स्पष्ट स्वर में करें
  • दीपक को माँ के चरणों से सिर तक घुमाएँ
  • आरती के बाद प्रसाद सभी उपस्थित लोगों में वितरित करें

माँ काली आरती के लाभ

नियमित रूप से इस आरती को करने से मिलने वाले आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ:

आध्यात्मिक लाभ

  • कुंडलिनी जागरण में सहायक
  • तंत्र-मंत्र के बुरे प्रभावों से रक्षा
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त

सांसारिक लाभ

  • शत्रु भय से मुक्ति
  • कार्यक्षेत्र में सफलता
  • पारिवारिक कलह का नाश

निष्कर्ष: माँ की कृपा पाने का सरल साधन

माँ काली की यह आरती भक्ति के साथ गाने पर अद्भुत फलदायी सिद्ध होती है। प्रतिदिन संध्या के समय इस आरती का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा माँ का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। याद रखें – माँ भक्त के निष्काम भाव से प्रसन्न होकर उसे अमरत्व का वरदान देती हैं।

ॐ जय माँ काली! शक्ति दात्री हम सबकी रक्षा करो॥

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