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Magh Gupt Navratri 2025 12 फरवरी से न करें ये कार्य

12 फरवरी 2025 से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानें किन कार्यों से बचें और कैसे पाएं मां दुर्गा का आशीर्वाद। सही पूजा विधि और वर्जित कार्यों की पूरी जानकारी।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

माघ गुप्त नवरात्रि 2025: 12 फरवरी से शुरू, जानें व्रत के नियम और विशेष बातें

हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह नवरात्रि साधना, तंत्र-मंत्र और गूढ़ विद्याओं की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। 2025 में माघ गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी से प्रारंभ होकर 20 फरवरी तक चलेगी। इस अवधि में माँ दुर्गा के दस महाविद्याओं की उपासना का विधान है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की पूजन विधि, महत्व और वर्जित कार्यों के बारे में विस्तार से…

Contents
माघ गुप्त नवरात्रि 2025: 12 फरवरी से शुरू, जानें व्रत के नियम और विशेष बातेंगुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों है विशेष?माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का शुभ मुहूर्तदस महाविद्याओं की उपासना का क्रमगुप्त नवरात्रि में भूलकर भी न करें ये कार्यव्रत-पूजा संबंधी निषेधसामाजिक निषेधगुप्त नवरात्रि पूजन विधिघटस्थापना की विधिदैनिक पूजा क्रमगुप्त नवरात्रि के लाभनिष्कर्ष

गुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों है विशेष?

सामान्य नवरात्रि की तरह ही वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रि भी आती है – एक माघ मास में और दूसरी आषाढ़ मास में। “गुप्त” शब्द का अर्थ है छिपा हुआ, क्योंकि इस दौरान साधक गोपनीय तरीके से माँ दुर्गा की विशेष शक्तियों की आराधना करते हैं।

  • तांत्रिक साधना: इन नौ दिनों में तांत्रिक विधियों से दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है।
  • कामना पूर्ति: गुप्त नवरात्रि में की गई साधना से रहस्यमयी शक्तियों की प्राप्ति होती है।
  • आध्यात्मिक लाभ: इस समय साधना करने से कुंडलिनी जागरण में सहायता मिलती है।

माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का शुभ मुहूर्त

  • प्रारंभ तिथि: 12 फरवरी 2025 (बुधवार)
  • समापन तिथि: 20 फरवरी 2025 (गुरुवार)
  • घटस्थापना मुहूर्त: 12 फरवरी सुबह 6:23 बजे से 8:42 बजे तक
  • प्रतिपदा तिथि: 11 फरवरी रात 9:58 बजे से 12 फरवरी रात 11:24 बजे तक

दस महाविद्याओं की उपासना का क्रम

गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा के दस रूपों की पूजा की जाती है:

  • काली (प्रथम दिन)
  • तारा (द्वितीय दिन)
  • त्रिपुर सुंदरी (तृतीय दिन)
  • भुवनेश्वरी (चतुर्थ दिन)
  • छिन्नमस्ता (पंचम दिन)
  • त्रिपुर भैरवी (षष्ठी दिन)
  • धूमावती (सप्तमी दिन)
  • बगलामुखी (अष्टमी दिन)
  • मातंगी (नवमी दिन)
  • कमला (दशमी दिन)

गुप्त नवरात्रि में भूलकर भी न करें ये कार्य

इस विशेष साधना काल में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं, जिन्हें करने से साधना का फल नष्ट हो सकता है:

व्रत-पूजा संबंधी निषेध

  • लहसुन-प्याज: इन दिनों तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें।
  • अनाज: कुछ साधक केवल फलाहार पर रहते हैं, गेहूं-चावल का सेवन न करें।
  • मानसिक अशुद्धता: क्रोध, झूठ, चोरी जैसे दोषों से बचें।

सामाजिक निषेध

  • मांस-मदिरा: नवरात्रि में किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।
  • नकारात्मक संगति: तामसिक प्रवृत्ति वाले लोगों के साथ उठने-बैठने से बचें।
  • वस्त्र ध्यान: काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करें।

गुप्त नवरात्रि पूजन विधि

घटस्थापना की विधि

  • सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते लगाएं।
  • कलश पर लाल कपड़ा बांधकर उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
  • कलश के ऊपर नारियल रखकर माँ दुर्गा का आवाहन करें।

दैनिक पूजा क्रम

  • प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • लाल या पीले आसन पर बैठकर माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
  • प्रतिदिन संबंधित महाविद्या की विशेष पूजा करें।
  • सायंकाल में आरती करके भोग लगाएं।

गुप्त नवरात्रि के लाभ

इस विशेष नवरात्रि में साधना करने से अद्भुत फल प्राप्त होते हैं:

  • शत्रु बाधा निवारण: बगलामुखी साधना से शत्रुओं पर विजय मिलती है।
  • धन प्राप्ति: माँ कमला की उपासना से आर्थिक लाभ होता है।
  • रोग मुक्ति: धूमावती साधना से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • मोक्ष प्राप्ति: तारा देवी की उपासना से अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का यह पावन अवसर आध्यात्मिक उन्नति के लिए अद्वितीय है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के गुप्त रूपों की साधना करके साधक जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें कि इस दौरान मन-वचन-कर्म से पवित्र रहना और वर्जित कार्यों से दूर रहना ही सफल साधना का मूल मंत्र है। माँ दुर्गा सभी साधकों को अपनी असीम कृपा प्रदान करें!

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