# Mangla Gauri Vrat: सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा विधि, कथा और आरती
प्रस्तावना
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस पावन माह में मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। आज सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है, जो भक्तों के लिए माता गौरी की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। आइए, जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि, मंगला गौरी व्रत कथा और आरती के बारे में विस्तार से।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में मंगला गौरी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत माता पार्वती के मंगला गौरी रूप को समर्पित है। सावन के हर मंगलवार को इस व्रत को रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इस व्रत से:
- सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
- संतान सुख और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- कुंडली के मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि बेहद सरल है, लेकिन इसे श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
सामग्री
- माता गौरी की मूर्ति या चित्र
- लाल वस्त्र, चुनरी
- हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल
- दीपक, घी, धूप, अगरबत्ती
- मेवा, फल, पंचामृत
- सुपारी, लौंग, इलायची
पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- लाल कपड़े पर माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करें।
- हल्दी, कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाएं।
- दीपक जलाकर धूप-दीप से आरती करें।
- मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
मंगला गौरी व्रत कथा
एक समय की बात है, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी पत्नी नियमित रूप से मंगला गौरी व्रत रखती थी। एक बार साहूकार व्यापार के लिए दूसरे नगर गया और वहाँ उसकी मृत्यु हो गई। उसकी पत्नी को इस बात का पता नहीं था, लेकिन वह नियमित व्रत करती रही।
एक दिन माता गौरी ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसके पति को जीवित कर दिया। जब साहूकार घर लौटा, तो उसकी पत्नी की आस्था देखकर सभी हैरान रह गए। तभी से मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि देता है।
मंगला गौरी आरती
जय मंगला गौरी माता, मैया जय मंगला गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मंगला गौरी व्रत कथा, जो कोई नर सुनावे।
उसकी मनोकामना, माता पूरी करावे॥
ओम जय मंगला गौरी…
मंगला गौरी व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
- पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- क्रोध, झूठ और निंदा से बचें।
- गरीबों को भोजन या दान अवश्य दें।
निष्कर्ष
सावन का यह पावन माह भक्ति और आस्था से भरा हुआ है। मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की कृपा पाने का सर्वोत्तम माध्यम है। इस व्रत को श्रद्धा से करने पर माता गौरी अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर देती हैं। आज के दिन माता गौरी की आराधना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
हर हर महादेव! जय माता दी!
