हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अगहन मास भी कहा जाता है और यह भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना जाता है। इस पवित्र माह में व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है। लेकिन कुछ विशेष तिथियाँ ऐसी भी होती हैं, जिनमें शुभ कार्यों को करने से बचना चाहिए। आइए, जानते हैं कि मार्गशीर्ष माह 2025 में किन तिथियों पर शुभ कार्य वर्जित हैं।
मार्गशीर्ष माह 2025: महत्व और तिथियाँ
2025 में मार्गशीर्ष मास 20 नवंबर से शुरू होकर 18 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान कई पवित्र व्रत और त्योहार आएँगे, जैसे:
- मार्गशीर्ष एकादशी (30 नवंबर)
- विवाह पंचमी (5 दिसंबर)
- गीता जयंती (7 दिसंबर)
- मोक्षदा एकादशी (15 दिसंबर)
लेकिन कुछ तिथियाँ ऐसी भी हैं, जिनमें मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए।
मार्गशीर्ष माह 2025 में शुभ कार्य वर्जित तिथियाँ
1. अमावस्या तिथि (19 दिसंबर)
अमावस्या को पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। 2025 में मार्गशीर्ष माह की अमावस्या 19 दिसंबर को पड़ रही है।
2. चतुर्थी तिथि (23 नवंबर)
चतुर्थी तिथि को गणेश जी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन नए व्यापार, यात्रा या बड़े निवेश से बचना चाहिए। 2025 में यह तिथि 23 नवंबर को है।
3. अष्टमी तिथि (27 नवंबर, 6 दिसंबर)
अष्टमी तिथि को दुर्गा पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन इस दिन मुंडन, उपनयन संस्कार या नए वाहन की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। 2025 में यह तिथि 27 नवंबर और 6 दिसंबर को पड़ रही है।
4. चंद्रग्रहण (8 दिसंबर)
2025 में मार्गशीर्ष माह में 8 दिसंबर को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण काल में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य, मंदिर प्रवेश या दान कर्म वर्जित होते हैं।
मार्गशीर्ष माह में क्या करें?
इस पावन माह में निम्नलिखित कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है:
- भगवद् गीता का पाठ करें।
- तुलसी पूजा और दीपदान करें।
- गरीबों को अन्नदान करें।
- मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार उच्चारण करें।
निष्कर्ष
मार्गशीर्ष माह भक्ति और साधना के लिए उत्तम समय है, लेकिन कुछ तिथियों में शुभ कार्यों से बचकर ही हम इसका पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। 2025 में 19 दिसंबर (अमावस्या), 23 नवंबर (चतुर्थी), 27 नवंबर व 6 दिसंबर (अष्टमी) और 8 दिसंबर (चंद्रग्रहण) को शुभ कार्य न करें। इसके बजाय भगवान कृष्ण की आराधना करके इस माह को पवित्र बनाएँ।
आशा है, यह जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। हरि ओम!
