मोहिनी एकादशी 2025: आज बन रहे हैं कई शुभ योग, जानें मुहूर्त और पूजा मंत्र
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और मोहिनी एकादशी इनमें से एक पावन तिथि है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। मोहिनी एकादशी 2025 में भक्तों के लिए अनेक शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के पुण्य फल को और बढ़ा देते हैं। इस लेख में हम आपको मोहिनी एकादशी का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
मोहिनी एकादशी का महत्व
पुराणों के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। मोहिनी एकादशी का नाम भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने देवताओं को अमृत पिलाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था।
- पापों से मुक्ति मिलती है
- धन-धान्य की प्राप्ति होती है
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है
- पारिवारिक सुख-शांति बढ़ती है
मोहिनी एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 में मोहिनी एकादशी 10 मई को मनाई जाएगी। नीचे दिए गए समय आपके लिए महत्वपूर्ण हैं:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 9 मई 2025, रात 10:15 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 10 मई 2025, रात 08:35 बजे
- व्रत पारण का समय: 11 मई, सुबह 05:45 से 08:15 तक
इस वर्ष मोहिनी एकादशी के दिन रवियोग, सिद्धियोग और अमृतसिद्धि योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं, जो व्रत के पुण्य फल को कई गुना बढ़ा देते हैं।
मोहिनी एकादशी व्रत विधि
मोहिनी एकादशी का व्रत रखने के लिए निम्न विधि का पालन करें:
व्रत से पूर्व की तैयारी
- दशमी की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें
- रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
व्रत के दिन की पूजा विधि
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- तुलसी दल, फूल, फल और मेवे से भगवान का श्रृंगार करें
- धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें
मोहिनी एकादशी के विशेष मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:
मूल मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
विष्णु सहस्रनाम से विशेष श्लोक
“शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्”
मोहिनी अवतार मंत्र
“मोहिन्यै च विद्महे विष्णुरूपिण्यै धीमहि
तन्नो मोहिनी प्रचोदयात्”
मोहिनी एकादशी की कथा
स्कन्द पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक नगर में धृतिमान नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में एक वैश्य था जिसका नाम धनपाल था। वह भगवान विष्णु का परम भक्त था और नियमित रूप से पूजा-पाठ करता था।
एक बार धनपाल को व्यापार के सिलसिले में लंबी यात्रा पर जाना पड़ा। यात्रा के दौरान वह चोरों के हाथों पकड़ा गया और उसे कारागार में डाल दिया गया। कारागार में उसने मोहिनी एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे मुक्त कर दिया और उसे अपने धाम की प्राप्ति कराई।
मोहिनी एकादशी व्रत के नियम
- व्रत के दिन अन्न ग्रहण न करें
- पानी, फल और दूध का सेवन कर सकते हैं
- क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें
- पूरे दिन भगवान विष्णु का नाम जपते रहें
- रात्रि में भजन-कीर्तन करें
मोहिनी एकादशी व्रत के लाभ
इस पावन व्रत को करने से भक्तों को निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:
- पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है
- आर्थिक समस्याओं का निवारण होता है
- संतान प्राप्ति में सहायक है
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- अंत समय में विष्णु लोक की प्राप्ति होती है
निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। 2025 की मोहिनी एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के महत्व को और बढ़ा देते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की शरण में जाएं और उनके आशीर्वाद से जीवन को धन्य बनाएं।
