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इस एकादशी से मिलता है मोक्ष देवता भी रखते हैं व्रत

इस एकादशी का व्रत रखकर पाएं मोक्ष की प्राप्ति, जानें इसकी महिमा और पूजा विधि। देवता भी करते हैं इस व्रत को, आप भी पाएं आध्यात्मिक लाभ।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

इस एकादशी से मिलता है मोक्ष, देवता भी रखते हैं व्रत

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवशयनी एकादशी से लेकर देवोत्थान एकादशी तक, हर एकादशी का अपना अलग महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवता भी इस व्रत को रखते हैं? आइए जानते हैं इस पावन व्रत की महिमा, विधि और फल के बारे में।

Contents
इस एकादशी से मिलता है मोक्ष, देवता भी रखते हैं व्रतएकादशी व्रत का महत्ववैज्ञानिक दृष्टिकोणएकादशी व्रत की विधिव्रत से पूर्व की तैयारीव्रत के दिनएकादशी की विशेष कथाएंमोक्षदा एकादशी की कथादेवताओं और एकादशीएकादशी व्रत के लाभविशेष एकादशियाँ और उनका महत्वकामदा एकादशीनिर्जला एकादशीएकादशी व्रत में सावधानियांनिष्कर्ष

एकादशी व्रत का महत्व

शास्त्रों में एकादशी को “मोक्षदायिनी” कहा गया है। यह व्रत न केवल मनुष्यों बल्कि देवताओं द्वारा भी पालन किया जाता है। पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार:

  • एकादशी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है
  • व्रत रखने से तीनों लोकों के पापों से मुक्ति मिलती है
  • इस दिन अन्न ग्रहण करना वर्जित माना गया है
  • देवता भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार एकादशी व्रत रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। चंद्रमा का प्रभाव शरीर पर पड़ता है और इस दिन उपवास रखने से मानसिक शांति मिलती है।

एकादशी व्रत की विधि

एकादशी व्रत का पालन करने के लिए निम्न विधि का पालन करें:

व्रत से पूर्व की तैयारी

  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • रात्रि में भगवान का स्मरण करते हुए शीघ्र सोएं

व्रत के दिन

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें
  • निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखें
  • शाम को आरती करके फलाहार ग्रहण करें

एकादशी की विशेष कथाएं

मोक्षदा एकादशी की कथा

पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा: “हे केशव, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है?”

भगवान कृष्ण ने बताया कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।

देवताओं और एकादशी

शास्त्रों में उल्लेख है कि इंद्र, चंद्र और यम सहित सभी देवता एकादशी व्रत का पालन करते हैं। विष्णु पुराण में वर्णित है कि स्वर्ग में भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

एकादशी व्रत के लाभ

  • मोक्ष प्राप्ति: जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति
  • पापों का नाश: जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति
  • सुख-समृद्धि: घर में सुख-शांति का वास
  • स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

विशेष एकादशियाँ और उनका महत्व

कामदा एकादशी

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। यह सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है।

निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ मास की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने का विशेष महत्व है।

एकादशी व्रत में सावधानियां

  • क्रोध, झूठ और छल से बचें
  • तामसिक भोजन का सेवन न करें
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • निंदा और चुगली से दूर रहें

निष्कर्ष

एकादशी व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत है। यह न केवल मनुष्यों बल्कि देवताओं द्वारा भी पालन किया जाता है। मोक्षदायिनी इस व्रत का पालन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए, हम सभी इस पावन व्रत का पालन करके अपने जीवन को धन्य बनाएं।

भगवान विष्णु की कृपा सदैव आप पर बनी रहे!

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