माँ भवानी की अनुपम कृपा
माँ भवानी, जिन्हें हम दुर्गा, पार्वती, और शक्ति के नाम से भी जानते हैं, भक्तों पर असीम कृपा बरसाने वाली हैं। उनकी लीला अपरम्पार है, और उनके भक्तों के लिए वह हर संकट में सहारा बनकर आती हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही चमत्कारिक घटना के बारे में बताएंगे, जहाँ माँ भवानी स्वयं एक भक्त के घर जलावन (लकड़ी) पहुँचाती थीं।
माँ भवानी का भक्त के प्रति प्रेम
भक्त की निष्ठा और माँ की कृपा
एक समय की बात है, एक गाँव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह माँ भवानी का परम भक्त था और नियमित रूप से पूजा-अर्चना करता था। उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन उसकी भक्ति में कोई कमी नहीं थी। वह रोज़ सुबह उठकर माँ के मंदिर जाता, फूल चढ़ाता और धूप-दीप जलाता।
- उसकी दिनचर्या में माँ की पूजा सर्वोपरि थी।
- भक्ति के प्रति उसका समर्पण अद्वितीय था।
- माँ भवानी उसकी निष्ठा से प्रसन्न थीं।
संकट का समय और माँ की लीला
एक बार गाँव में भयंकर सर्दी पड़ी। ब्राह्मण के पास जलावन (लकड़ी) खत्म हो गया, और उसके पास रसोई जलाने के लिए कुछ नहीं बचा। वह चिंतित हो गया क्योंकि बिना आग के वह माँ को भोग भी नहीं लगा पाएगा। उस रात, उसने माँ से प्रार्थना की:
“हे माँ, मेरे पास रसोई जलाने के लिए लकड़ी नहीं है। कृपया मेरी सहायता करो, ताकि मैं तुम्हारा भोग लगा सकूँ।”
माँ भवानी का चमत्कार: जलावन की व्यवस्था
रात्रि का आश्चर्य
अगली सुबह जब ब्राह्मण उठा, तो उसने देखा कि उसके आँगन में ढेर सारी लकड़ियाँ पड़ी हुई हैं! वह हैरान रह गया। उसने सोचा कि शायद किसी ने दया करके ये लकड़ियाँ रख दी हों, लेकिन गाँव में किसी ने भी ऐसा नहीं किया था।
- लकड़ियाँ सुखी और जलाने के लिए तैयार थीं।
- ब्राह्मण ने माँ को धन्यवाद दिया और भोग तैयार किया।
माँ की सेवा का रहस्य
यह घटना रोज़ दोहराई जाने लगी। हर रात, जब ब्राह्मण सो जाता, तो माँ भवानी स्वयं उसके घर लकड़ियाँ लाकर रख देतीं। कुछ दिनों बाद, गाँव वालों ने इस चमत्कार के बारे में सुना और उस ब्राह्मण से पूछा:
“तुम्हारे घर रोज़ लकड़ियाँ कौन लाता है?”
ब्राह्मण ने कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन मैं समझता हूँ कि यह माँ भवानी की कृपा है।”
माँ के दर्शन और भक्त की परीक्षा
गाँव वालों की जिज्ञासा
गाँव वाले हैरान थे। उन्होंने फैसला किया कि वे रात को जागकर देखेंगे कि आखिर यह चमत्कार कैसे हो रहा है। कुछ लोगों ने छिपकर ब्राह्मण के घर का पहरा देना शुरू किया।
- आधी रात को एक दिव्य प्रकाश फैला।
- माँ भवानी स्वयं एक सुंदर स्त्री के रूप में प्रकट हुईं।
- उनके हाथ में लकड़ियों का गट्ठर था।
माँ का आशीर्वाद
गाँव वाले देखकर अचंभित रह गए। वे सभी माँ के चरणों में गिर पड़े और क्षमा माँगने लगे। माँ मुस्कुराईं और बोलीं:
“जो भक्त मुझे सच्चे मन से याद करता है, मैं उसके हर कष्ट को दूर करती हूँ। यह ब्राह्मण मेरा सच्चा भक्त है, इसलिए मैं स्वयं उसकी सेवा करती हूँ।”
शिक्षा: भक्ति की महिमा
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि माँ भवानी अपने भक्तों का कभी त्याग नहीं करतीं। वह छोटी से छोटी जरूरत का भी ध्यान रखती हैं।
- सच्ची भक्ति में किसी चीज़ की कमी नहीं होती।
- माँ की कृपा हर संकट को दूर कर देती है।
- भक्ति और समर्पण से माँ प्रसन्न होती हैं।
माँ भवानी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
निष्कर्ष: माँ की अनंत कृपा
माँ भवानी की यह लीला हमें याद दिलाती है कि वह हमेशा अपने भक्तों के साथ हैं। चाहे संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, माँ की कृपा सबसे बड़ी शक्ति है। हमें भी उस ब्राह्मण की तरह निष्काम भाव से माँ की भक्ति करनी चाहिए।
हर हर महादेव! जय माता दी!

