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नाग पंचमी 2025: नाग देवता की आराधना का पावन पर्व
हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व है। यह त्योहार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 2 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय दूर होता है और कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। आइए जानते हैं इसकी पूजा विधि, पौराणिक कथा और अष्ट नागों के स्मरण के लाभ।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में नागों को पाताल लोक का अधिपति माना गया है। इनकी पूजा से:
- सर्पदंश का भय समाप्त होता है
- पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
- कालसर्प योग का प्रभाव कम होता है
- धन-धान्य की प्राप्ति होती है
नाग पंचमी पूजा विधि
सुबह की तैयारी
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- चांदी, पीतल या मिट्टी के नाग की प्रतिमा स्थापित करें
मुख्य पूजन विधि
निम्न मंत्र के साथ प्रारंभ करें:
“ॐ नमः शेषाय नागाय फणाधराय ते नमः”
- नाग देवता को दूध, घी और शहद से स्नान कराएं
- चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें
- नैवेद्य में खीर या मीठे चावल का भोग लगाएं
- नाग गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें
विशेष मंत्र
नाग गायत्री मंत्र:
“ॐ शेषाय विद्महे पद्मनाभाय धीमहि तन्नो नागः प्रचोदयात्”
नाग पंचमी की पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णित है कि एक बार जनमेजय राजा ने सर्प यज्ञ किया जिसमें हजारों नाग जलने लगे। तक्षक नाग को बचाने के लिए आस्तीक मुनि ने यज्ञ रुकवाया। इसी दिन से नाग पंचमी मनाई जाती है।
एक अन्य कथा
मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने कालिया नाग का दमन किया था। गोकुलवासियों को सर्प भय से मुक्ति दिलाने के लिए उन्होंने नाग पूजन का विधान बताया।
अष्ट नागों का स्मरण और उनका महत्व
पुराणों में आठ प्रमुख नागों का वर्णन मिलता है। इनके नाम का स्मरण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है:
- अनंत: शेषनाग के रूप में विष्णु जी का आसन
- वासुकी: समुद्र मंथन में मंदराचल की रस्सी बने
- तक्षक: जिनसे जनमेजय के यज्ञ की कथा जुड़ी है
- पद्म: धन-संपत्ति के दाता माने जाते हैं
- महापद्म: पाताल लोक के संरक्षक
- कुलिक: कुटुम्ब रक्षा के देवता
- कर्कोटक: जिन्होंने नल राजा को वरदान दिया
- शंखपाल: भक्ति शक्ति के प्रतीक
अष्ट नाग स्तोत्र
इस मंत्र का पाठ करें:
“अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥”
नाग पंचमी के विशेष उपाय
- इस दिन नाग चंदन लगाने से सर्प भय दूर होता है
- नागदेव को सफेद फूल अर्पित करने से पितृ दोष शांत होता है
- नाग पंचमी पर दूध से सींची हुई दूर्वा घर में रखने से सुख-समृद्धि आती है
- मंदिर में चांदी का नाग-नागिन चढ़ाने से कालसर्प योग शांत होता है
निष्कर्ष
नाग पंचमी हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ सामंजस्य बनाकर रहने की प्रेरणा देती है। नाग देवता की पूजा कर हम उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस पावन पर्व पर अष्ट नागों का स्मरण अवश्य करें और पूर्ण श्रद्धा से पूजन संपन्न करें।
याद रखें – नाग पूजन के साथ-साथ सर्प संरक्षण का संकल्प भी लें। प्रकृति के इन अद्भुत प्राणियों के प्रति करुणा भाव रखें।
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