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Nag Panchami 2025: कब है नाग पंचमी, जानिए महत्व और इस दिन क्या करें और क्या न करें?
नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है। यह पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। नाग पंचमी 2025 में 28 जुलाई, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन सर्पों की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और कालसर्प दोष जैसे ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। आइए, जानते हैं इस पावन पर्व का महत्व, पूजा विधि और क्या करें-क्या न करें।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, नागों को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है। स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, इस दिन नागों की पूजा करने से सर्पदंश का भय दूर होता है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
- नाग पंचमी पर सर्पों को देवता मानकर उनकी पूजा की जाती है
- इस दिन नाग देवता की कृपा से कुंडली के सर्प दोष दूर होते हैं
- पौराणिक मान्यता: इसी दिन माता कद्रू ने अपने पुत्रों (नागों) को आशीर्वाद दिया था
नाग पंचमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
नाग पंचमी तिथि: 28 जुलाई 2025 (सोमवार)
पंचमी तिथि प्रारंभ: 27 जुलाई 2025 को रात 09:32 बजे से
पंचमी तिथि समाप्त: 28 जुलाई 2025 को रात 11:48 बजे तक
पूजा का शुभ समय: सुबह 05:30 बजे से 08:30 बजे तक
नाग पंचमी पूजा विधि
नाग पंचमी के दिन इस विधि से पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- घर के मंदिर में नाग देवता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- नाग देवता को दूध, घी, शहद और कुमकुम अर्पित करें
- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें: “ॐ कुरुकुल्ले हुं फट स्वाहा”
- नाग देवता की आरती उतारें और प्रसाद वितरित करें
नाग पंचमी पर क्या करें?
इस पावन पर्व पर इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- नागों को दूध पिलाएं: किसी सर्प बिल के पास दूध चढ़ाएं (आधुनिक विज्ञान के अनुसार यह हानिकारक हो सकता है, अतः प्रतीकात्मक रूप से करें)
- नाग मंदिर जाएँ: प्रसिद्ध नाग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करें
- व्रत रखें: इस दिन उपवास रखने से विशेष फल मिलता है
- दान करें: गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करें
नाग पंचमी पर क्या न करें?
इस दिन इन बातों से विशेष परहेज करें:
- जमीन खोदने से बचें: इस दिन कुदाल या अन्य औजारों से जमीन न खोदें
- सर्पों को न मारें: किसी भी सर्प को हानि न पहुँचाएँ
- लोहे के बर्तन में भोजन न करें: इस दिन लोहे के बर्तनों का उपयोग न करें
- वृक्ष न काटें: पेड़-पौधों की कटाई से बचें
नाग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णित है कि एक बार महर्षि कश्यप की पत्नी कद्रू ने हजारों नागों को जन्म दिया। जब उनके पुत्रों ने माता कद्रू की सेवा की, तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन जो मनुष्य नागों की पूजा करेगा, उसे सर्पभय नहीं होगा। तभी से यह पर्व मनाया जाता है।
प्रमुख नाग मंदिर जहाँ करें दर्शन
- नागेश्वर मंदिर, द्वारका: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक
- मन्नारशाला नागराज मंदिर, केरल: 30,000 नाग प्रतिमाओं वाला प्रसिद्ध मंदिर
- भुजंग नाग मंदिर, राजस्थान: यहाँ नागों की जीवित प्रजातियाँ निवास करती हैं
नाग पंचमी का आधुनिक महत्व
आज के वैज्ञानिक युग में भी नाग पंचमी का महत्व बना हुआ है। यह पर्व हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। सर्प खेतों में चूहों आदि को खाकर फसलों की रक्षा करते हैं। इस दिन सर्पों की पूजा कर हम उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं।
निष्कर्ष
नाग पंचमी हमारी प्राचीन संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। 28 जुलाई 2025 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर हमें नाग देवता की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। साथ ही, सर्पों के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। इस लेख में बताई गई पूजा विधि और सावधानियों का पालन कर आप नाग पंचमी का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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