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नंदा सप्तमी 2025: आज है नंदा सप्तमी, जाने इसका महत्व और पूजा विधि
हिंदू धर्म में नंदा सप्तमी का विशेष महत्व है। यह त्योहार भगवान कृष्ण की बहन नंदा देवी को समर्पित है, जिन्हें सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की देवी माना जाता है। नंदा सप्तमी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। 2025 में यह पर्व 3 सितंबर को पड़ रहा है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व, पूजन विधि और कथा।
नंदा सप्तमी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, नंदा देवी भगवान कृष्ण की अग्रजा (बड़ी बहन) थीं। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन नंदा देवी की विधि-विधान से पूजा करने पर:
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
- कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है
- सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
नंदा सप्तमी पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर निम्न विधि से पूजा करें:
सामग्री तैयार करें
- लाल या पीले रंग का वस्त्र
- फूल, फल, मिठाई
- घी का दीपक
- कुमकुम, चावल, हल्दी
- नंदा देवी की प्रतिमा या चित्र
पूजन प्रक्रिया
- साफ-सुथरे स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं
- नंदा देवी की प्रतिमा स्थापित करें
- घी का दीपक जलाएं
- फूल, अक्षत, सिंदूर चढ़ाएं
- इस मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ नंदायै नमः”
- कथा सुनें और आरती करें
नंदा सप्तमी व्रत कथा
पुराणों के अनुसार, नंदा देवी का जन्म देवकी की सातवीं संतान के रूप में हुआ था। कंस के भय से वसुदेव ने उन्हें यमुना नदी में प्रवाहित कर दिया, जहाँ से वे नंद बाबा के घर पहुँच गईं। बाद में योगमाया के रूप में उन्होंने कंस का वध करने में कृष्ण की सहायता की।
विशेष उपाय
- इस दिन कन्याओं को भोजन कराएं
- नदी या तालाब में दीपदान करें
- नंदा सप्तमी व्रत रखकर संध्या समय पारण करें
निष्कर्ष
नंदा सप्तमी हमें भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की याद दिलाती है। यह पर्व स्नेह, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन सच्चे मन से नंदा देवी की आराधना करने पर जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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