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Navratri 2025: उत्तराखंड हिमाचल में माता सती के नयन

Published September 29, 2025
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6 Min Read

माता के नयनों की पावन भूमि

नवरात्रि का पावन पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का समय होता है। इस दौरान भक्तों की भीड़ शक्तिपीठों की ओर उमड़ पड़ती है, जहाँ माता सती के अंग गिरे थे। ऐसे ही दो पवित्र स्थान उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं, जहाँ माता के नयन (आँखें) गिरे थे। ये दोनों शक्तिपीठ अपने आध्यात्मिक महत्व और चमत्कारिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

Contents
माता के नयनों की पावन भूमिशक्तिपीठ क्या हैं? माता सती की पौराणिक कथादेवी सती का त्याग और शिव का क्रोध51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति1. नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेशमंदिर का स्थान और महत्वमंदिर की पौराणिक कथादर्शनीय स्थल और आरती का समयकैसे पहुँचें?2. नंदा देवी मंदिर, उत्तराखंडमंदिर का स्थान और महत्वनंदा देवी राजजात यात्रामंदिर की विशेषताएँकैसे पहुँचें?नवरात्रि में इन शक्तिपीठों का महत्वमाता के दर्शन से मिलती है आध्यात्मिक शांति

इस लेख में हम इन दोनों शक्तिपीठों – नैना देवी (हिमाचल) और नंदा देवी (उत्तराखंड) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

शक्तिपीठ क्या हैं? माता सती की पौराणिक कथा

देवी सती का त्याग और शिव का क्रोध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो माता सती (शिव की पत्नी) अपने पिता के यज्ञ में पहुँच गईं। वहाँ दक्ष ने शिव का अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर सती ने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।

जब भगवान शिव को यह पता चला, तो उनका क्रोध विश्वविनाशी हो उठा। उन्होंने सती के शरीर को उठाकर तांडव नृत्य शुरू कर दिया। पूरा ब्रह्मांड उनके क्रोध से काँप उठा।

51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति

ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया। जहाँ-जहाँ माता के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बन गए।

इनमें से दो स्थानों पर माता के नयन (आँखें) गिरे:

  • नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश – माता की आँखों का निचला भाग गिरा।
  • नंदा देवी मंदिर, उत्तराखंड – माता की आँखों का ऊपरी भाग गिरा।

1. नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

मंदिर का स्थान और महत्व

नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है। यहाँ माता की आँखों का निचला भाग गिरा था, इसलिए इसे नैना (आँख) देवी कहा जाता है।

मंदिर की पौराणिक कथा

एक कथा के अनुसार, यहाँ भगवान श्रीराम ने माता सती की पूजा की थी। एक अन्य मान्यता यह है कि एक ग्वाले ने सपने में माता को देखा और उनके निर्देश पर इस मंदिर की स्थापना की।

दर्शनीय स्थल और आरती का समय

  • मुख्य मंदिर – यहाँ माता की दो नेत्रों के रूप में पूजा होती है।
  • नैना झील – मान्यता है कि इस झील में स्नान करने से नेत्र रोग दूर होते हैं।
  • आरती समय – प्रातः 6:00 बजे और संध्या 7:00 बजे।

कैसे पहुँचें?

  • हवाई मार्ग – निकटतम हवाई अड्डा चंडीगढ़ (लगभग 100 किमी)।
  • रेल मार्ग – नजदीकी स्टेशन अंबाला (लगभग 70 किमी)।
  • सड़क मार्ग – दिल्ली से बस या कार द्वारा पहुँचा जा सकता है।

2. नंदा देवी मंदिर, उत्तराखंड

मंदिर का स्थान और महत्व

नंदा देवी मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। यहाँ माता की आँखों का ऊपरी भाग गिरा था। नंदा देवी को उत्तराखंड की कुलदेवी माना जाता है।

नंदा देवी राजजात यात्रा

हर 12 साल में नंदा देवी राजजात यात्रा निकाली जाती है, जो लगभग 280 किमी की पैदल यात्रा है। यह यात्रा अत्यंत कठिन है और भक्तों का विश्वास है कि माता स्वयं इस यात्रा का मार्गदर्शन करती हैं।

मंदिर की विशेषताएँ

  • मुख्य मूर्ति – माता नंदा देवी की प्रतिमा चाँदी की है।
  • पर्वतों से घिरा स्थान – यह मंदिर हिमालय की गोद में बसा है।
  • पूजा विधि – यहाँ विशेष मंत्रों के साथ पूजा की जाती है।

कैसे पहुँचें?

  • हवाई मार्ग – निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (लगभग 180 किमी)।
  • रेल मार्ग – काठगोदाम रेलवे स्टेशन (लगभग 90 किमी)।
  • सड़क मार्ग – अल्मोड़ा से टैक्सी या बस द्वारा पहुँचा जा सकता है।

नवरात्रि में इन शक्तिपीठों का महत्व

नवरात्रि के दिनों में इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों का मानना है कि इन दिनों में माता की कृपा सबसे अधिक प्राप्त होती है।

  • कलश स्थापना – नवरात्रि के पहले दिन विशेष विधि से कलश स्थापित किया जाता है।
  • अखंड दीप – नौ दिनों तक मंदिर में अखंड दीप जलाया जाता है।
  • कंजक पूजन – अष्टमी या नवमी को कन्याओं को भोजन कराया जाता है।

माता के दर्शन से मिलती है आध्यात्मिक शांति

ये दोनों शक्तिपीठ न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिपूर्ण हैं। नवरात्रि 2025 में अगर आप माता के दर्शन करना चाहते हैं, तो इन पावन स्थलों की यात्रा अवश्य करें।

जय माता दी! 🙏

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